
क्या सच में डीएफओ को भी मिलता है दलाली में कमीशन, शायद इस लिए डीपी साहू देते हैं वन भूमि के बिक्री का परमिशन..?
सूरजपुर में वन भूमि का सरेआम सौदा, वीडियो में पैसे गिनते दिखे सरपंच; आखिर डीएफओ साहू की चुप्पी का ‘रेट’ क्या है?
वन विभाग की भूमि की खरीदी बिक्री का वीडियो और सरपंच के हस्ताक्षर और सील के साथ पंचनामा सामने आने के बाबजूद भी धृतराष्ट्र क्यों बने डीएफओ डीपी साहू…?
सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर/बिहारपुर: भ्रष्टाचार जब बेशर्मी की हदें पार कर दे, तो वह ‘कोल्हुआ’ जैसा कांड बन जाता है। सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र से एक ऐसा पुख्ता सबूत सामने आया है, जिसने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की साख को धूल में मिला दिया है। ग्राम पंचायत कोल्हुआ के सरपंच राम लाल पण्डो न केवल वन विभाग के जमीन के सौदागर बने, बल्कि उनका पैसे गिनते हुए वीडियो भी वायरल हो रहा है, जब सरपंच खुद पैसे गिनते हुए दिख रहे हैं और बिक्रीनामा के तौर पर उन्होंने वन विभाग की भूमि का सौदा दूसरे व्यक्ति से कर पंचनामा तैयार कराया जिसमें स्वयं हस्ताक्षर कर एक सरपंच के तौर पर किया और सरपंच की सील का दुरुपयोग करते हुए उसे बिक्रीनामा में प्रयोग भी किया, जब इस बात की जानकारी हमें एक सूत्रधार से लगी तो उसने हमें बताया कि खरीदने वाला व्यक्ति जिस समाज से आता है और वह उन्हीं के समाज से ही आता है और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते वह यह जानकारी हमसे साझा कर रहा है क्योंकि वह स्थानीय पत्रकार होने के नाते इस खबर का प्रकाशन नहीं कर सकता। इसमें हैरानी की बात है कि सूरजपुर वनमण्डलाधिकारी डीपी साहू जिनके कार्यप्रणाली पर पूर्व भी काफी सवाल खड़े हुए हैं क्योंकि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद वन्यजीवों की स्थिति चाहे वह जंगल के राजा की मौत की कहानी हो या फिर अन्य जीवों की यह एक गंभीर विषय बना हुआ है, क्योंकि डीएफओ डीपी साहू किसी मामले में कार्रवाई करने के आधार पर उत्तरदाई नहीं उतर पा रहे हैं, चांदनी–बिहारपुर के एक विश्वसनीय सूत्र ने हमें बताया कि डीएफओ डीपी साहू वन विभाग की जमीनों की खरीदी बिक्री पर अपना एक कमीशन सेट कर रखे हैं। और बिना अपना हिस्सा लिए एक पत्ता तक नहीं हिलना देते हैं। साथ ही हमारे सूत्र ने आरोप लगाते हुए बताया कि डीपी साहू जोकि एक डीएफओ है बावजूद इसके पेड़ों की कटाई या फॉरेस्ट क्षेत्र से हो रहे अवैध उत्खनन को रोकने के बजाय अपना कमीशन बांध लेते हैं जिसे दलाली का यह कार्य बड़ी ही सुगमता से चलता रहता है। सूत्र ने इस विषय पर और भी गंभीर आरोप लगाते हुए हमें बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपी साहू यानी डीएफओ साहब अपना मुंह खोलते हैं और मामले की गंभीरता को तौलते हुए अपना कमीशन बताते हैं, सीधे-साधे दिखने वाले डीपी साहू काफी भ्रष्ट हैं ऐसा कहना हमारे सूत्र का है हालांकि यह सूत्र से मिली जानकारी है इसे हम प्रमाणित तौर पर नहीं कह सकते। लेकिन इस मामले की जानकारी होने के बावजूद भी डीएफओ की चुप्पी किसी बड़ी डील या मिली भगत की ओर इशारा जरूर करती है क्योंकि पूरे जिले में वन विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति लिखित तौर पर सरपंच के सील साइन के साथ बिक्री नाम सामने आने और वीडियो में पैसा गिनते हुए देखे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना कहीं ना कहीं डीएफओ के खरीद फरोक करने वाले लोगों से मिली भगत की ओर इशारा करता है हालांकि इस संबंध में डीएफओ को मैसेज माध्यम से अवगत कराया गया है और फोन के माध्यम से भी उनसे जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन डीएफओ ने इस संबंध में कोई भी जवाब नहीं दिया है। हो सकता है कि सूत्र की बातें सही हो और भोली भाली सूरत वाले वरिष्ठ व्यक्ति के रूप में पदस्थ डीएफओ डीपी साहू सच में भ्रष्ट हो।
सबूत नंबर 1: सील-मुहर के साथ वन विभागके भूमि की’ डकैती
भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत वह पंचनामा है, जिसमें वन विभाग की तीन एकड़ जमीन को बेचने का स्पष्ट तौर पर उल्लेख है। इस अवैध दस्तावेज पर सरपंच की सील और हस्ताक्षर मौजूद हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सरपंच को न तो कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का डर। उन्होंने सरकारी पद का उपयोग सरकारी संपत्ति को ही निजी हाथों में बेचने के लिए किया।


सबूत नंबर 2: वीडियो में कैद हुई सरपंच की काली कमाई
मामला तब और भी पुख्ता हो गया जब सरपंच का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे जमीन के बदले पैसे गिनते साफ देखे जा सकते हैं। यह वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि कोल्हुआ में वन भूमि की बंदरबांट किसी बड़े सिंडिकेट के इशारे पर हो रही है। डेढ़ लाख रुपये की इस डील ने सरपंच के असली चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
डीएफओ साहू के ‘मौन’ पर सुलगते सवाल
इतने पुख्ता सबूत—सील लगा पंचनामा और पैसे गिनने का वीडियो—होने के बाद भी सूरजपुर डीएफओ (DFO) डीपी साहू के हाथ अब तक आरोपियों के गिरेबान तक क्यों नहीं पहुँचे?
सीधे सवाल जो डीएफओ को कटघरे में खड़ा करते हैं:
जब वीडियो और पंचनामा सार्वजनिक है, तो डीएफओ साहू किस “जांच” का इंतजार कर रहे हैं?
क्या इस डेढ़ लाख की डील में डीएफओ कार्यालय तक भी ‘हिस्सा’ पहुँचा है, जिसके कारण कार्यवाही दफन कर दी गई?
क्या डीएफओ साहब ने पैसे लेकर अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है और वन भूमि को बिकने के लिए लावारिस छोड़ दिया है?
क्या सूरजपुर में अब वन रक्षक ही ‘वन भक्षक’ बन चुके सरपंचों के मददगार हैं?
अपराधियों का गठजोड़: सरपंच और खरीदार
सरपंच राम लाल पण्डो ने तो गद्दारी की ही है, लेकिन वे लोग भी बराबर के अपराधी हैं जिन्होंने सरकारी वन भूमि को खरीदने का दुस्साहस किया। यह सीधे तौर पर वन अधिनियम का उल्लंघन है, जिसमें सरपंच और खरीदार दोनों को पर तत्काल कार्रवाई होना चाहिए।
निष्कर्ष: अब आर-पार की लड़ाई
कोल्हुआ की यह तीन एकड़ जमीन सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन की ईमानदारी की परीक्षा है। अगर डीएफओ डीपी साहू अब भी कोई कार्यवाही नहीं करते, तो यह साफ हो जाएगा कि इस भू-घोटाले के असली सूत्रधार वे खुद हैं। जनता अब जवाब चाहती है। यह अग्निपरीक्षा डीएफओ डीपी साहू के साख और विभाग के ईमानदारी का परिचय देगी या मिलीभगत केवल सूत्रों की जुबानी नहीं स्पष्ट प्रमाण होगा।
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