सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय अंबिकापुर इन दिनों तथाकथित शिक्षण संस्थानों के लिए मोटी कमाई का ‘हब’ बन चुका है। शिक्षा की आड़ में युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलकर अपनी जेबें भरने का खेल चरम पर है। शहर में संचालित सांध्य पैरामेडिकल और केपी पैरामेडिकल जैसे संस्थानों पर छात्रों ने बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। शिकायतें कई बार हुईं, लेकिन आरोप है कि ‘रिश्वत के रसूख’ के आगे जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है और मौन सहमति दे रखी है। यूनिवर्सिटी के ‘दलाल’ बने संस्थान, छत्तीसगढ़ काउंसिल में रजिस्ट्रेशन तक नहीं!विश्वस्त सूत्रों और पीड़ित छात्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये संस्थान असल में कोई कॉलेज या मान्यता प्राप्त अकैडमी नहीं, बल्कि शहडोल और भोपाल (मध्य प्रदेश) की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के ‘एजेंट’ या ‘दलाल’ मात्र बनकर रह गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई कोर्सेज का छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल में वैध रजिस्ट्रेशन तक नहीं है।लूट का खेल: ये तथाकथित संस्थान छात्रों से एडमिशन के नाम पर यूनिवर्सिटी की वास्तविक फीस से दोगुनी रकम वसूलते हैं। दाखिले से लेकर टीसी और सीसी तक सब कुछ सीधे बाहरी यूनिवर्सिटी से ही जारी होता है। इन बिचौलियों का काम सिर्फ छात्रों को फांसना और यूनिवर्सिटी के बीच दलाली कर अपना कमीशन सीधा करना है। सांध्य पैरामेडिकल और केपी पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट द्वारा छात्रों से दोगुनी फीस लेकर उन्हें अपने संस्थान की रशीद दी जाती है जबकि एडमिशन यूनिवर्सिटी में होता है, मतलब ये संस्थान केवल यहां रविन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी भोपाल और मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी भोपाल के दलाल बैंक रह गए हैं। इनके द्वारा सही शिक्षा तक नहीं दी जाती है क्योंकि इनके पास छत्तीसगढ़ पैरामेडल काउंसिल के गाइडलाइन योग्य शिक्षक ही नहीं है। जब ये संस्थान किसी भी प्रकार से न लैब, न शिक्षक: 5 हजार की नौकरी की ‘सेटिंग’मानकों की बात करें तो इन संस्थानों के पास न तो नियमानुसार योग्य शिक्षक हैं, न खेल परिसर और न ही उचित प्रैक्टिकल की सुविधाएं। सांध्य पैरामेडिकल जैसे संस्थानों के पास एक मानक लैब तक नहीं है। अपनी कमियों को छुपाने के लिए ये संस्थान कुछ निजी अस्पतालों और लैब्स के साथ ‘साठगांठ’ करते हैं। वहां छात्रों को जैसे-तैसे 5 से 7 हजार रुपये प्रति माह की मामूली नौकरी पर बैठा दिया जाता है। कई छात्रों को तो यह भी नसीब नहीं होता। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना उचित ट्रेनिंग के ये छात्र क्या सीख रहे होंगे और मरीजों की जान के साथ क्या खिलवाड़ होगा? धोखाधड़ी का लेवल: पैसे खाए, एडमिशन तक नहीं कराए!एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि धोखाधड़ी का स्तर इस कदर है कि कई छात्रों से मोटी रकम वसूलने के बावजूद महीनों तक यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन तक नहीं कराया जाता। जब छात्र दबाव बनाते हैं, तो बैकडेट या एक-दो साल बाद सेटिंग के जरिए एडमिशन दिखाया जाता है। जब छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर सर्टिफिकेट लेते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल में अपनी ही डिग्री/डिप्लोमा को वैध कराने के लिए ‘नाक रगड़नी’ पड़ती है। सांध्य पैरामेडिकल के संचालक पर गंभीर आरोपमामला सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी और दलाली तक ही सीमित नहीं है। एक छात्र ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि सांध्य पैरामेडिकल के संचालक शेखर यादव द्वारा कथित तौर पर प्रलोभन देकर छात्राओं के शोषण का प्रयास या अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की जाती है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में एक ऐसे ही मामले की भनक जब उनकी पहली पत्नी को लगी, तो भारी बवाल हुआ था, जिसे बाद में रफा-दफा कर शांत कराया गया। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए इसकी जमीनी सच्चाई और तह तक केवल प्रताड़ित छात्राएं, सजग छात्र या स्वयं संचालक ही बयान कर सकते हैं, लेकिन इस तरह के आरोपों ने संस्थान के चरित्र पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।आखिर कब तक अंबिकापुर के छात्र इन ‘शिक्षा माफियाओं’ के जाल में फंसकर अपना पैसा और करियर बर्बाद करते रहेंगे? क्या प्रशासन इस दलाली के धंधे पर नकेल कसने का साहस दिखा पाएगा? अनिवार्य वैधानिक मान्यता काउंसिल से अनुमति: छत्तीसगढ़ में कोई भी पैरामेडिकल कोर्स (डिप्लोमा/डिग्री) चलाने के लिए छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल से अनापत्ति प्रमाण पत्र और संबद्धता मिलना अनिवार्य है।बाहरी यूनिवर्सिटी का नियम: यदि कोई संस्थान किसी बाहरी राज्य (जैसे MP के शहडोल या भोपाल) की यूनिवर्सिटी का ‘स्टडी सेंटर’ या ‘लर्निंग सेंटर’ बनकर कोर्स करा रहा है, तो उस कोर्स को छत्तीसगढ़ काउंसिल से मान्यता प्राप्त होना जरूरी है, अन्यथा वह डिग्री/डिप्लोमा छत्तीसगढ़ की सरकारी नौकरियों या वैध प्रैक्टिस के लिए अमान्य होगी। 2. अकादमिक एवं फैकल्टी मानक योग्य प्राध्यापक: प्रत्येक कोर्स के लिए पूर्णकालिक और योग्य शिक्षक होने चाहिए। उदाहरण के लिए, पैथोलॉजी या लैब टेक कोर्सेज के लिए MD Pathology या कम से कम M.Sc (Medical Lab Tech) डिग्री धारक फैकल्टी होना अनिवार्य है।छात्र-शिक्षक अनुपात: काउंसिल के नियम के अनुसार हर 10 या 15 छात्रों पर एक योग्य फैकल्टी/ट्यूटर होना अनिवार्य है। 3. इंफ्रास्ट्रक्चर और लैब की गाइडलाइंस स्वयं की मानक लैब: संस्थान के पास स्वयं की सुसज्जित प्रयोगशाला होनी चाहिए, जिसमें बायोकेमिस्ट्री, हेमेटोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी आदि के आधुनिक उपकरण चालू हालत में हों।हॉस्पिटल अटैचमेंट: पैरामेडिकल संस्थान के पास या तो स्वयं का न्यूनतम 100 बेड का अस्पताल होना चाहिए या फिर किसी मान्यता प्राप्त बड़े अस्पताल के साथ क्लिनिकल ट्रेनिंग के लिए वैध MOU होना चाहिए। बिना इसके प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अवैध है।अन्य सुविधाएं: क्लासरूम का निश्चित कारपेट एरिया, लाइब्रेरी (जिसमें पर्याप्त मेडिकल जर्नल्स और किताबें हों), छात्र-छात्राओं के लिए अलग कॉमन रूम और खेल/शारीरिक विकास के लिए परिसर होना अनिवार्य है।4. पारदर्शी फीस और छात्र कल्याणफीस का निर्धारण: कोई भी संस्थान अपनी मर्जी से दोगुनी फीस नहीं वसूल सकता। फीस रेगुलेटरी कमेटी या काउंसिल द्वारा निर्धारित फीस ही ली जा सकती है। रसीद संस्थान के नाम पर और पारदर्शी होनी चाहिए।एडमिशन और डॉक्यूमेंटेशन: छात्रों के ओरिजिनल दस्तावेज जमा रखकर उन्हें प्रताड़ित करना या यूनिवर्सिटी में एडमिशन रोके रखना सीधे तौर पर क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के अंतर्गत आता है। Post navigation पत्रकार ने मांगी सुरक्षा, जान से मारने की साजिश का लगाया आरोप