
चोर – चोर मौसेरे भाई आखिर अमित,नवीन ने अधूरे घरों को बात की क्यों छुपाई..?
क्या केवल भ्रष्टाचार में PHD होल्डर हैं नवीन जायसवाल..?
आखिर अधूरे घरों की सच्चाई अपने अधिकारियों को क्यों नहीं बताई..?
दिन के उजाले में जिला सीईओ और कलेक्टर की आंखों में बिना डर झोकते रहे धूल..?
या खेल रहे थे अपने अधिकारियों के साथ अप्रैल फूल
कहीं नींव खुदी तो कहीं घर ही कहीं और बनी,कहीं प्लिंथ लेवल,कहीं डोर लेवल तो कहीं खंडहर लेवल में पहुंच चुके घरों को सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया कंप्लीट
कहीं सरकारी जमीन में बना घर तो कहीं सरकारी कर्मचारी को मिला आवास,कहीं एक ही घर में पति पत्नी के नाम आया आवास एक बनाया दूसरे का पैसा खा गए या दोनों बनाया..पूछने पर सर झुकाया और बताया बहुतों के यही है हाल हमको छोड़ दो साहब हम हैं बेहाल..?
क्या कलेक्टर और जिला सीईओ को भी थी मामले की जानकारी ये झोंका इनके आंखों में टारगेट पूरा करने का धूल..?

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर भैयाथान ब्लॉक में प्रधानमंत्री आवास योजना जो कि प्रदेश के डबल इंजन सरकार की काफी महत्वाकांक्षी योजना है और सरकार का पूरा फोकस इस ओर है की जरूरतमंदों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास का लाभ दिया जाए और उनके जीवन को एक बेहतर आयाम दिया जाए शासन की यह योजना निसंदेह बहुत ही अच्छी है इस योजना के तहत कई ऐसे लोग जिन्हें पैसों की वास्तविक तंगी के कारण घर बनाने में कठिनाई आती है या यूं कहें वह पक्के का मकान नहीं बना पाते हैं ऐसे लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण हो या शहरी एक नई उम्मीद लेकर आती है, प्रदेश भर में लाखों करोड़ों आवास आज पर्यंत तक बन चुके होंगे या यूं कहें उन्हें कंप्लीट बताया गया होगा हमें जब इस बात की जानकारी हुई की ग्राम सिरसी में कई ऐसे मकान है जो अभी भी अधूरे हैं जो पूरे नहीं हो सके हैं उन्हें भी सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण बताया गया है। जब इस बात की पुष्टि हमने साक्ष के साथ की तो इस मामले की जानकारी जनपद सीईओ और टेक्निकल असिस्टेंट नवीन जायसवाल को भी दी परंतु इस मामले पर टेक्निकल असिस्टेंट नवीन जायसवाल अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आए और उन्होंने बताया कि वह सिर्फ एक ही गांव को नहीं देखते हैं ऐसे बहुत सारे गांव हैं जिनकी जिम्मेदारी उनके कंधे पर है पर ऐसे में सवाल उठता है की बहुत सारे गांव की जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति कहीं हर जगह गलत तो नहीं कर रहा है। क्योंकि जब हमने भैयाथान ब्लॉक के सिरसी ग्राम पंचायत की खबर प्रकाशित की तो हमें आसपास के लोगों द्वारा संपर्क करके यह बताया गया की भैया आपके द्वारा जो भी मामला उठाया गया है वह तो सिर्फ एक गांव का आप उठाए हैं हम आपको और भी गांव के बारे में बता सकते हैं जहां इस प्रकार का घोटाला हुआ है और यह घोटाला पूरे ब्लॉक की कहानी है।
जब हमने जिला से आई टीम के साथ मिलकर जिला टीम को एक-एक घरों को दिखाना शुरू किया तब हमारे द्वारा दिखाए गए किसी भी घर को जिला की टीम में अपनी आंखों से देखने के बाद भी पूर्ण नहीं बता पाए, जबकि वह सारे घर सरकारी कागजों में कंप्लीट या पूर्ण बताए गए हैं। जब हमारे द्वारा और घरों को भी दिखाया जा रहा था तब दीपक साहू जो कि जिला टीम के तरफ से जांच करने आए हुए थे उन्होंने समय का हवाला देकर कुछ ही घरों को मात्र देखकर पंचनामा तैयार किया और उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की गई अगर दीपक साहू थोड़ी देर और रुक जाते तो हमने जितने घरों के नाम और लिस्ट दिए थे वह सारे घर अधूरे हैं इसकी पुष्टि हो जाती फिर भी दीपक साहू को हमने जितने भी घर दिखाएं वह सारे अपूर्ण थे इस बात को उन्होंने पंचनामा में लिखा भी है। वास्तव में ग्राम पंचायत सिरसी अपने आप में एक अनोखा पंचायत है। ऐसे तो बहुत सारे पंचायत हैं पर अभी तक उनके राज खुले नहीं है जिसके चलते बाकियों पर कुछ कहना अभी उचित नहीं होगा लेकिन सिरसी ऐसा ग्राम पंचायत है जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। जिस आवास की पुष्टि जिले के जिला सीईओ और कलेक्टर बड़े शान से करते हो और अपनी उपलब्धि गिनते थकते ना हो ऐसे आवास की सच्चाई कुछ देर में ही खुलकर रह गई इस मामले पर आज पर्यंत तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है जो की उपर बैठे अधिकारियों पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है, की क्या उनकी भी मिली भगत थी और केवल नीचे के कर्मचारियों को डराना धमकाना और उन्हें नौकरी से निकलने की बात कहना कहीं अपने आप को बचाने की कोशिश तो नहीं। इस संपूर्ण मामले पर रोजगार सहायक और आवास मित्र को ही केवल बली का बकरा बनाया जा रहा है और हमें अपने विश्वास सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर रोजगार सहायक और आवास मित्र की नौकरी की बली लेकर और अन्य लोगों को बचाकर मामले को रफा दफा करने के प्रयत्न में जिला और जनपद की टीम लगी हुई है।
नवीन जायसवाल टेक्निकल असिस्टेंट और अमित खैरवार ब्लॉक कोऑर्डिनेटर प्रधानमंत्री आवास योजना को इन सब बातों की जानकारी थी की टारगेट पूरा करने के नाम पर केवल अधूरे घरों को या यूं कहें निर्माणाधीन, निर्माण शुरू हुए मात्र घरों को भी पूर्ण बताने का काम किया गया था इसकी संपूर्ण जानकारी इन दोनों को थी। आखिर जब इस संपूर्ण मामले पर दीपक साहू की जांच से और हिंद स्वराष्ट्र के सहयोग से घरों की सच्चाई सामने आ चुकी है तो फिर सब कुछ जानते हुए गलत जानकारी देना शासन को बेवकूफ बनाना और कलेक्टर जिला सीईओ की आंखों में धूल झोंकने वाले नवीन जायसवाल और अमित खैरवार के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं की गई है क्या इन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है..? नवीन जायसवाल और अमित खैरवार को जब इस मामले की जानकारी थी तो उन दोनों के द्वारा चुप्पी साधी गई यह क्यों साधी गई यह तो यही दोनों बता सकते हैं। रोजगार सहायक और आवास मित्र जैसे छोटे कर्मचारी इन सब घोटाले में अपने आप को कभी नहीं फसाएंगे और बिना ऊपर के अधिकारियों के मौखिक आदेश के ऐसा करेंगे भी नहीं जिस बात की पुष्टि रोजगार सहायक के बयान से हो भी चुकी है।
सीएम साहब के द्वारा सरकार का गठन करते ही सबसे पहले 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे उनकी महत्वाकांक्षी योजना जिसमें प्रदेश और देश दोनों की डबल इंजन सरकार मिलकर इस सपने को साकार करने में लगी है लेकिन नवीन जायसवाल और अमित खैरवार के द्वारा इस सपने को काल्पनिक बनाया जा रहा है।
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