नाम भगवान का काम शैतान का, मृतक आशुतोष दास को आज मिला न्याय, महावीर हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर
चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाले और मानवता को तार-तार करने वाले अम्बिकापुर के श्री महावीर हॉस्पिटल के काले कारनामों की परतें आखिरकार जांच के बाद पूरी तरह उधड़ चुकी हैं। न्यूरो सर्जरी जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील इलाज में घोर लापरवाही, साक्ष्य छिपाने की घिनौनी साजिश और आयुष्मान योजना के नाम पर खुलेआम लूटपाट करने वाले इस अस्पताल पर प्रशासन का शिकंजा कस गया है। तमाम प्रशासनिक जांचों और साक्ष्यों के आधार पर महावीर हॉस्पिटल का पंजीयन और लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद आज मृतक आशुतोष दास और उनके शोकसंतप्त परिजनों को आखिरकार न्याय की किरण नजर आई है।
क्या था पूरा मामला? गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त
आवेदिका श्रीमती मृण्मयी पाण्डेय ने श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी।                                      आरोपों के मुताबिक: साक्ष्य छिपाने और मिटाने की साजिश: अस्पताल प्रबंधन पर मुख्य रूप से मेडिकल रिपोर्ट (सी.टी. स्कैन, एक्स-रे, रेफरल और डेथ समरी) जानबूझकर परिजनों को न देने का गंभीर आरोप था, ताकि इलाज में बरती गई लापरवाही के सबूत छिपाए जा सकें।
अवैध वसूली का खेल: मरीज के पास वैध आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद, अस्पताल ने इलाज के नाम पर 6 से 7 लाख रुपये की अवैध वसूली की।
गलत इलाज से मौत: सही समय पर सही और उच्च स्तरीय इलाज न मिलने के कारण मरीज आशुतोष दास की दर्दनाक मौत हो गई।
जांच में खुली अस्पताल प्रबंधन की पोल
शिकायत मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), अम्बिकापुर द्वारा एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी।                                                 जांच प्रतिवेदन में जो खुलासे हुए, उन्होंने अस्पताल की पोल खोलकर रख दी:अयोग्य और गैर-पंजीकृत डॉक्टर से सर्जरी: मरीज के मस्तिष्क की न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम अस्पताल के आधिकारिक पंजीयन दस्तावेजों में दर्ज ही नहीं था। न्यूरो सर्जरी एक ‘टर्शरी केयर’ (Tertiary Care) इलाज है, और अस्पताल के पास इस सुविधा का कोई कानूनी अधिकार या उल्लेख नहीं था।
जिम्मेवारी से भागता प्रबंधन: अस्पताल के प्रोप्राइटर डॉ. सुधांशु किरण ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए बेतुका तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आरोपी बनाया है, जबकि इलाज डॉक्टरों की टीम ने किया था। लेकिन नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल संचालन की पूर्ण और अंतिम जिम्मेदारी प्रोप्राइटर की ही होती है। विभाग को बिना किसी पूर्व सूचना के यह खतरनाक खेल खेला गया।
आयुष्मान के नाम पर दोहरी लूट: जांच में स्पष्ट हुआ कि अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड के जरिए शासन से पूरी राशि तो पहले ही डकार ली थी, इसके बावजूद परिजनों से अवैध रूप से 87,300 रुपये नकद और वसूले गए।
आदतन अपराधी जैसी कार्यप्रणाली: पूर्व में भी इस अस्पताल द्वारा मरीजों से अधिक राशि वसूलने की शिकायतें मिल चुकी हैं, जिस पर केवल कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इससे साफ जाहिर होता है कि महावीर हॉस्पिटल नियमों को ताक पर रखकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा था।
अस्पताल प्रबंधन की गिरी हुई हरकत: म्यूल अकाउंट्स से की गईं भद्दी टिप्पणियां
जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान श्री महावीर हॉस्पिटल के प्रबंधन की बौखलाहट और उनका आपराधिक मानसिक स्तर तब खुलकर सामने आया, जब उनके द्वारा फेसबुक पर फर्जी (म्यूल) अकाउंट्स बनाकर मृतक आशुतोष दास और उनके शोक संतप्त परिजनों के खिलाफ अत्यंत गंदी, आपत्तिजनक और भद्दी टिप्पणियां की जाने लगीं। अपनों को खो चुके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का यह घटिया प्रयास अस्पताल प्रबंधन के अमानवीय चेहरे को बेनकाब करने के लिए काफी था,इस म्यूल अकाउंट के जरिए विदेश के लोगों के नाम से बने फर्जी अकाउंट से परिजनों के प्रति गलत और भद्दी टिप्पणियां की जा रही थी हैरानी की बात तो यह है कि शिकांगो,फ़िलिपींस,कनाडा,मलेशिया,बांग्लादेश,थाईलैंड, जैसे कैस देशों के लोगों की फर्जी आईडी बनाकर परिजनों के खिलाफ और अस्पताल के पक्ष में कमेंट किए जा रहे थे,हैरानी की बात है कि वो भी हिंदी में।
प्रशासन का कड़ा एक्शन: लाइसेंस सस्पेंड और शासन को प्रतिवेदन
तमाम सबूतों, गैर-कानूनी गतिविधियों और नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए प्रशासन ने निम्नलिखित कड़ी कार्रवाई की है:
लाइसेंस निलंबित: नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन पर श्री महावीर हॉस्पिटल का लायसेंस और पंजीयन दिनांक 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवम्बर 2026 तक (पूरे 1 माह के लिए) पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है।
आयुष्मान पंजीयन पर भी लटकी तलवार: अस्पताल द्वारा अवैध रूप से वसूले गए 87,300 रुपये वापस कराने के निर्देशों के अनुपालन में, खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना/आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन अगले 3 महीने के लिए निलंबित करने हेतु शासन को आधिकारिक प्रतिवेदन प्रेषित कर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को निर्देशित कर दिया गया है।
अंततः हुई सत्य की जीत
एक तरफ जहां अस्पताल प्रबंधन अपनी काली करतूतों को छुपाने के लिए सोशल मीडिया पर ओछी हरकतें कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और कानूनी डंडे ने यह साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन द्वारा अपने मामले को छुपाने और अपनी छवि सुधारने (damage control) करने के उद्देश्य से अपने द्वारा जारी वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करवाया जा रहा था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद आज मृतक आशुतोष दास की आत्मा को शांति और उनके परिजनों को सच्ची राहत व न्याय मिला है।

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