क्या विधायक और मंत्री के सपोर्ट से कानून को मुट्ठी में रखते हैं कुछ लोग..?
सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र प्रशान्त पाण्डेय सूरजपुर के बहुचर्चित मामले में इस तरह लीपापोती की गई है की इसका कोई हिसाब तक नही है, अब अगर हम कुछ लिखने लगे तो दहेज और पावर के दम पर बैठे लोग हमे कहने लगेंगे की तुम्हे क्या बहुत ज्यादा जानकारी है कानून की वगैरा वगैरा आदि बाते कहने लगेंगे लेकिन इन अधिकारियों ने और पुलिस प्रशासन ने अब तो हदें भी पार कर रखीं हैं,जब जच्चा और बच्चा की मौत पर हमारे निडर मीडिया बंधु शांत नही हुए और लगातार समाचार प्रकाशित करते रहे तब इन लोगों ने पोछा पकड़कर लिपापोती करते हुए मामूली सी धारा में अपराध दर्ज करने का नाटक करने लगे। लेकिन ये पढ़े लिखे अपने आप को बड़े अधिकारी समझने वाले चाहे अपने कंधे पर स्टार का धौंस दिखाने वाले हों या झोलाछाप डाक्टर हों सब अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इस कृत्य ने कहीं ना कहीं कानून और न्याय से आम जन मानस का भरोसा ही उठा दिया है,ऐसे लोगों का इलाज बस्तर भेज कर ही करना चाहिए क्योंकि उसे इंसान समझना ही गलत होगा जो एक पिता का औलाद खोने का दर्द पैसों और पावर के आगे ना समझ सके।
इस मामले में और बिंदुओं को नजरंदाज क्यों किया जा रहा है..?
इस मामले पर कुछ बिंदुओं को हटा कर केवल लीपापोती की जा रही है ऐसा मामले में कार्यवाही को देख कर लगता है, सबकी मिली भगत है।
जिस घर में डोली जाति है उसी घर में अर्थी उठती उसी तर्ज पर रिटायर होंगे साहब…?
जिस घर में डोली जाति है उसी घर में अर्थी उठती है उसी तर्ज पर क्या जिले से अब सीधा रिटायर होंगे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ?? क्या इस गैर कानूनी तरीके से संचालित नर्सिंग होम में सीएमएचओ की कोई भूमिका नहीं है.?? क्या उनका फर्ज नही था की वे नर्सिंग होम पर कार्यवाही करे और सबसे बड़ी बात तो यह है की वह नर्शिंग होम उनके घर के एकदम समीप ही संचालित था फिर भी उसके रजिस्ट्रेशन पर अभी भी सवाल है तो यह नर्शिंग होम चल कैसे रहा था??
अपराध ?
1. महिला डॉक्टर रश्मि कुमार जिला अस्पताल में पदस्थ है उनके द्वारा प्रसूता के परिजनों बेहतर इलाज होने का झांसा देकर खुद के नर्सिंग होम ले जाना.
2. प्रसूता के परीक्षण में जच्चा बच्चा सुरक्षित बताए गए थे और नार्मल डिलवरी की बात की थी, तो ऑपरेशन की स्थिति क्यो बनी..? और मृत नवजात होना..?
3. मृत नवजात होने पर पुलिस को सूचना देने का प्रवधान है नही दिया गया.? उल्टा परिजनों को फावड़ा देकर नदी किनारे दफन करवाया गया..?
4. प्रसूता को खून की आवश्यकता होने पर उन्होंने खुद ब्लड बैंक फोन कर o+ खून मंगवाए गए. जिसमे ब्लड बैंक के प्रभारी उनके बराबर सहयोगी है, नर्सिंग होम में ब्लड बैंक के प्रभारी का पैथोलॉजी लैब संचालित है डॉक्टर और ब्लड बैंक प्रभारी बराबर के दोषी..?
5. दूसरी बार प्रसूता को ब्लड चढ़ाये जाने पर तबियत खराब होने पर परिजन तत्काल उसे दूसरे अस्पताल ले जाना कि प्रकिया में बाधक बनी..?
6.परिजन एम्बुलेंस को फोन किये, एम्बुलेंस आ भी रहा था, लेकिन खुद डॉक्टर रश्मि कुमार ने एम्बुलेंस चालक को फोन में आने को मना किया, एम्बुलेंस आधे रास्ते से लौट गया..?
7. आधी रात को प्रसूता की मौत होने पर परिजनों को टार्चर कर तत्काल शव ले जाने का दबाव बनाया..?
8. शव ले जाने के लिए पैसे रुपये देने की बात की, परिजन वार्ड रूम को अंदर से बंद कर शव के साथ रात गुजारी,स्थिति यह हो गई थी.?
9. सबसे बड़ा अपराध यह है कि रश्मि नर्सिंग होम का पंजीयन..CMHO ने बताया टेम्परेरी है तो क्या इस तरह नर्सिंग होम का संचालन अवैध है ऊपर से ऑपरेशन करना..?
10. नर्सिंग होम एक्ट का उलंघन, इसके नोडल अधिकारी बराबर के जिम्मेदार..?
11. डॉक्टरों की जांच टीम में नर्सिंग होम क्रियावन करवाने वाले नोडल अधिकारी भी शामिल है.
12. महिला डॉक्टर के ऐसे कृत्य होते आ रहे है जिम्मेदार CMHO की भूमिका संदिध..?
क्या इतने सारे कृत्यों पर सिर्फ धारा 304(ए) ही धारा लगनी चाहिए थी और क्या और धाराएं नही जुड़ने चाहिए थे..?
इतने सारे तथ्य होने के बाबजूद भी अगर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौन रहे तो फिर इनसे न्याय की उम्मीद करना ही बेकार है क्योंकि जब इतने बड़े मामले पर ये पढ़े लिखे अधिकारी पक्ष लेने लगे तो फिर पीड़ित को न्याय तो कैसे..?
अब यदि इतना कुछ होने के बाद अगर ये अधिकारी केवल पत्रकारों का मुंह बंद करने के लिए अपने चहेते डॉक्टर को बचा रहे हैं तो फिर यह कहना गलत नहीं होगा की अब ऐसे लोगों से न्याय की उम्मीद तो की ही नही जा सकती जो सिफारिश और दहेज जैसी प्रथा के कारण आगे बढ़े हों..?
दहेज एक सामाजिक बुराई है लेकिन आज ये दहेज अच्छे अच्छे झोलाछाप को भी बड़े बड़े डॉक्टरों जैसा रुतबा दिला देता है,खैर प्रशासन की टीम से यही उम्मीद है की पीड़ित को न्याय दिला सकें…..
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