जमीन घोटाले का अड्डा बन चुका है लटोरी तहसील,जरूरतमंद पड़े हैं कतार में भू माफियों संग साहब बैठे हैं 5 स्टार में..?

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर लटोरी तहसील में आए दिन राजस्व घोटाले के नए नए मामले सामने आ रहे हैं यहां इतने घोटाले हुए हैं जिन्हें प्रकाशित करने में सालों का समय लग सकता है। यहां तहसीलदार के साथ साठ गांठ करके त्र्यंबक गुप्ता ने शासकीय मत से प्राप्त भूमि पर अपना आशियाना बना रखा है जिस भूमि पर त्र्यंबक गुप्ता ने अपना मकान और दुकान बना रखा है उसका नामांतरण आज पर्यंत तक नहीं हुआ है और ना ही इसके रजिस्ट्री के लिए कलेक्टर की अनुमति ली गई है।

शुरुआत से चला जेब भरने का अभियान,शायद सबको मिली रिश्वत वाली बोटी इसी लिए मौन धारण कर बैठे हैं जिम्मेदार..?

हमें अपने विश्वनीय सूत्र से जानकारी मिली कि इस जमीन का शासकीय पट्टा 1994 में जुगुल बरगाह के नाम पर बना और ठीक एक वर्ष बाद ही उसे बिना कलेक्टर के अनुमति के ही 1995 में गीता सिंह के नाम जमीन का नामांतरण कर दिया गया एक इसी घोटाले को दोहराते हुए 2024 में एक बार फिर भू माफिया संजय गुप्ता और तहसीलदार के साठगांठ से इस जमीन को त्र्यंबक गुप्ता के नाम उसके बड़े भाई के द्वारा पावर ऑफ अटॉर्नी के प्रयोग से उसे रजिस्ट्री करा दी गई,सब अपना कमीशन और दलाली की रकम लेकर खुश हो गए। आज तक प्रशासन अपनी कुम्भकरणीय नींद से नहीं जाग पाया है।प्रदेश स्तरीय मंत्री के पिए या स्वयं प्रदेश स्तरीय मंत्री के दबाव में आज तक कार्यवाही का साहस नहीं जुटा पाया है जिला प्रशासन यह एक सवालिया निशान है क्योंकि हमें ऐसी जानकारी मिल रही हैं कि तहसीलदार के कुछ वीवीआइपी रिश्तेदार हैं जिनके सहायता से तहसीलदार अपने आप को बचाने का प्रयास कर रहे हैं जिसका खुलासा भी हम जल्द करेंगे और बताएंगे कि वो कौन वीवीआइपी है जिसके सह पर आज तक दोषियों पर कार्यवाही नहीं हो पाई है।

कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे गुप्ता ब्रदर्स

छत्तीसगढ़ के नियम और कानून को कुछ भ्रष्ट अधिकारी और दलालों ने मजाक बना कर रख दिया है,अगर दलाल और नशेड़ी और अधिकारी का गठजोड़ हो जाए तो फिर नियमों को कैसे तोडा जाता है यह कोई उनसे पूछे जो नियमों को कागज पर लिखा काला अक्षर भैंस बराबर समझते हैं।जिस जमीन पर बिना अनुमति रजिस्ट्री पे रजिस्ट्री हो रही है उस जमीन पर बिना अनुमति महुआ का फूल बेचने का बोर्ड बड़े शान से लगाया गया है और आज तक इस पर किसी अधिकारी की नजर तक नहीं गई है,शायद हो सकता है बिना लाइसेंस महुआ की दुकान से जो फायदा होता होगा उसमें से 20/50 जिम्मेदार लोगों तक भी जाता होगा।गूगल के अनुसार महुआ बेचने के लिए छत्तीसगढ़ में कुछ प्रक्रिया है जिसका पालन करना अनिवार्य है लेकिन त्र्यंबक गुप्ता और बोला गुप्ता के द्वारा एक बोर्ड  मुख्य मार्ग पर इसका बोर्ड चस्पा किया गया है जिसमें लाइसेंस का जिक्र तक नहीं है और होगा भी कहां से क्योंकि यहां तो महुआ इतने आसानी से बेचा जाता है जैसे मानो किराने का सामान गूगल के अनुसार छत्तीसगढ़ में महुआ को दुकान में खुले तौर पर बेचना उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। महुआ फूल या उससे बनी शराब को बेचने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है। विस्तार में:
उत्पाद शुल्क अधिनियम:
छत्तीसगढ़ में, महुआ के फूल और उससे बनी शराब की बिक्री उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत विनियमित होती है।
लाइसेंस की आवश्यकता:
महुआ फूल या शराब को बेचने के लिए, व्यक्ति को उत्पाद शुल्क विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना होता है।
खुले तौर पर बिक्री:
बिना लाइसेंस के महुआ को खुले तौर पर बेचना अवैध है और इसके लिए दंड का प्रावधान है।
अन्य उपयोग:
महुआ के फूलों का उपयोग खाद्य पदार्थों, पारंपरिक दवाओं और अन्य गैर-शराब उत्पादों में किया जाता है, लेकिन इसके लिए भी कुछ नियम और शर्तें लागू हो सकती हैं।

सूत्र बताते हैं कि इस जमीन में संजय गुप्ता जो अपने आप को भाजपा का नेता कहता है वह नेताओं का धौंस दिखाकर और कुछ नेताओं से अधिकारियों को फोन करवाकर अपना गलत काम भी बड़े आसानी से करवा लेता हैं,और जब इन सब से बात ना बने तो रिश्वत का सहारा लेकर अपना काम करवा ही लेता हैं।सूत्र ने आगे बताया कि बुंदिया निवासी त्रयंबक गुप्ता संजय गुप्ता का करीबी रिश्तेदार है जिसके चलते संजय गुप्ता के द्वारा इस जमीन में भी दलाली करते हुए इस जमीन का शीघ्रता पूर्वक बिना परमिशन ही रजिस्ट्री करवा दिया।