सरकारी नौकरी और 1.5 लाख वेतन के बावजूद भी फर्जी पत्रकार बन वसूली करते है दो कर्मचारी

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर: केंद्र सरकार के एक प्रतिष्ठित विभाग में कार्यरत दो कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी के दौरान और बाद में फर्जी पत्रकार बनकर अधिकारियों से अवैध वसूली करने का मामला सामने आया है। लगभग 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन मिलने के बावजूद दोनों आरोपी अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर शराब और अन्य निजी खर्चों की पूर्ति के लिए इस आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कर्मचारी अधिकारियों को डरा-धमकाकर धन उगाही करते थे। कॉलेज में पढ़ाई के दिनों में दोनों आरोपी जेब खर्च और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अखबार बांटने (न्यूजपेपर वेंडर) का काम करते थे। हालांकि, केंद्र सरकार में स्थायी नौकरी और बेहतर वेतन मिलने के बाद भी उनका लालच कम नहीं हुआ और वे फर्जी पत्रकारिता की आड़ में वसूली के रास्ते पर चल पड़े। साथ ही कई नेताओं के खास होने का दावा करने वाले दोनों कर्मचारी अपने अटेंडेंस अधिकारी से सांठगांठ करके ड्यूटी टाइम में सरकारी काम छोड़ पत्रकार बनने निकल जाते हैं। इन दोनों की आदत ऐसी हो गई है कि जब तक ये दोनों पत्रकार बनकर  वसूली ना कर ले इनका खाया दाना पचता तक नहीं है। शराब और कबाब के लत ने इन दोनों को इस तरह मजबूर कर दिया है कि इन्हें अपनी नौकरी के जाने का भी डर नहीं रहा है।

सूत्र बताते हैं कि
ये दोनों कर्मचारी और इनके पोषित लोग एक गांव में इक्कठा होकर देशी से शराब का सेवन करते करते अपना भेद ना खुलने की बात कर रहे थे साथ ही इस डर में भी थे कि कोई इनकी पोल सबूतों के साथ ना खोल दे।

ऐसे लोगों को हम बताना चाहेंगे जब तक हमारे पास कोई साक्ष्य ना हो हम उस विषय पर कोई टिप्पणी तक नहीं करते हैं लेकिन जब साक्ष्य होते हैं तो भले लड़ाई लंबी हो उसे उसी मजबूती के साथ लड़ा जाता है।
और इस विषय पर यह न्यूज की शुरूआत है अभी परत दर परत न्यूज सबूतों के साथ आने लगेंगे।