जीवित वृद्धा को ‘मृत’ दिखाकर जमीन हड़पने वाले निलंबित SDM संजय राठौर FIR के बाद फरार, हिंद स्वराष्ट्र, सिंधु स्वाभिमान को नोटिस भेज डराने का किया था प्रयास

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर/भैयाथान सच की आवाज को दबाने की तमाम कोशिशों और मानहानि के नोटिसों को दरकिनार कर निष्पक्ष पत्रकारिता ने एक बार फिर प्रशासनिक भ्रष्टाचार के किले को ध्वस्त कर दिया है। 75 वर्षीया जीवित वृद्धा शैलकुमारी देवी को कागजों में “मृत” दर्शाकर करोड़ों की जमीन हड़पने के सनसनीखेज मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपियों में शामिल तत्कालीन तहसीलदार एवं वर्तमान विवादित SDM संजय कुमार राठौर फरार बताए जा रहे हैं।


मानहानि के नोटिस से एफआईआर तक: सच की बड़ी जीत
करीब एक वर्ष पूर्व ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचारपत्र और सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र ने सूरजपुर जिले के भैयाथान क्षेत्र में हुए इस संगठित भू-माफिया और प्रशासनिक गठजोड़ का पर्दाफाश किया था। ग्राम कोयलारी निवासी 75 वर्षीया वृद्धा शैलकुमारी देवी की स्व-अर्जित भूमि (ग्राम करकोटी, खसरा नं. 45/3, रकबा 0.405 हेक्टेयर) को हड़पने के लिए उनके सौतेले बेटे विरेन्द्र नाथ दुबे ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर दावा किया था कि वृद्धा की मृत्यु 09 फरवरी 1967 को हो चुकी है—जबकि हकीकत यह थी कि वृद्धा ने यह जमीन 1976 में खरीदी थी और वे आज भी जीवित हैं।
तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार राठौर और पटवारी एंजलिना भगत ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या जांच के, मात्र एक माह के भीतर (27/12/2024) जीवित वृद्धा का नाम काटकर सौतेले बेटे का नाम चढ़ाया। इतना ही नहीं, नामांतरण के तुरंत बाद इस बहुमूल्य जमीन का एक बड़ा टुकड़ा तहसीलदार संजय कुमार राठौर की पत्नी शारदा राठौर के नाम पर स्थानांतरित कर दिया गया।
खबर उजागर होने पर बौखलाए आरोपियों ने ‘हिंद स्वराष्ट्र’ समाचारपत्र और सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र को दबाने के लिए मानहानि का कानूनी नोटिस थमाया था, लेकिन समाचार पत्र अपने तथ्यों पर अडिग रहा।
जांच रिपोर्ट में खुलासा, बीएनएस की संगीन धाराओं में मामला दर्ज
कलेक्टर सूरजपुर और संभागायुक्त सरगुजा द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट में ‘हिंद स्वराष्ट्र’ के खुलासे का एक-एक शब्द सत्य पाया गया। जांच के आधार पर थाना झिलमिली में अपराध क्रमांक 0185/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है:
धारा 318(4): धोखाधड़ी एवं छल
धारा 338: कूटचरित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करना
धारा 336(3) व 340(2): जाली दस्तावेजों का असली रूप में उपयोग
धारा 61(2): आपराधिक षड्यंत्र
मुख्य नामजद आरोपी

1 संजय कुमार राठौर (तत्कालीन तहसीलदार, भैयाथान एवं निलंबित SDM — वर्तमान में फरार)
2 विरेन्द्र नाथ दुबे (सौतेला बेटा/मुख्य षड्यंत्रकारी)
3 एंजेलिना भगत (हलका पटवारी)
4 कमलेश दुबे


पुलिस का शिकंजा कसते ही भागे SDM
प्रशासनिक स्तर पर पहले निलंबित होकर अन्य जिले में स्थानांतरित हुए संजय राठौर पर जैसे ही पुलिस की आपराधिक प्राथमिकी का शिकंजा कसा, वे भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होते ही SDM साहब अपना मुख्यालय और घर छोड़ भाग खड़े हुए है, और जिससे बौखलाए उनके सहयोगी फरार बताए जा रहे हैं।
पीड़ित 75 वर्षीया वृद्धा को न्याय दिलाने और फर्जीवाड़े के इस बड़े खेल में शामिल रसूखदारों को कानून के कटघरे में खड़ा करने की दिशा में यह कार्रवाई एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन फरार आरोपियों को कब तक सलाखों के पीछे भेजता है।