शासकीय कन्या उ.मा.वि. अधिना सलका में बड़ा प्रशासनिक व वित्तीय घपला: रिटायर्ड प्राचार्य ने खोला राज


  •प्रभारी प्राचार्य पर वित्तीय प्रभार न देने, रिश्वत मांगने और फर्जी भुगतान कराने के गंभीर आरोप


  •रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के नाम पर बिना प्रशिक्षण दिए ₹5,000 की अवैध निकासी


  •PFMS खाते से ₹40,300 की अफरा-तफरी, बिना प्रभार के पदस्थ रहते हुए किया गया आहरण


  •बिना ड्यूटी आए वेतन निकालने, फर्जी छुट्टी दर्ज करने और संविलियन में धोखाधड़ी की उच्चस्तरीय जांच की मांग
सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र गोपनीय संवाददाता सूरजपुर / भैयाथान
सूरजपुर जिले के विकासखंड भैयाथान अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अधिना सलका में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक मनमानी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य ओमप्रकाश योगी ने 03 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा गठित जांच टीम के समक्ष अपना लिखित बयान दर्ज कराते हुए विद्यालय के पूर्व प्रभारी प्राचार्य चन्द्रपाल कुशवाहा एवं अन्य शिक्षकों की मिलीभगत से किए जा रहे वित्तीय गबन और धांधली का पर्दाफाश किया है।


1. प्राचार्य को प्रभार से रखा दूर, मानसिक अवसाद में गुजरा कार्यकाल
पूर्व प्राचार्य ओमप्रकाश योगी ने जांच समिति को दिए अपने लिखित बयान में बताया कि शासन द्वारा पदोन्नति के पश्चात उन्होंने 02 सितंबर 2025 को शासकीय कन्या उ.मा.वि. अधिना सलका में प्राचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण किया था।
कार्यभार ग्रहण करने के दौरान तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य चन्द्रपाल कुशवाहा उपस्थित नहीं थे। अगले दिन जब वे आए, तो औपचारिक स्वागत के बाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि “DDO  सहित समस्त प्रभार नीलिमा लकड़ा (व्याख्याता) को दे देंगे, आपको इसमें 5-7 हजार रुपये लग जाएंगे”।
इसके साथ ही उन्होंने यह कहकर दबाव बनाया कि “आप जल्द रिटायर हो जाएंगे, इसलिए प्रभार आपके लिए उचित नहीं है”। कभी ऑडिट का बहाना बनाकर तो कभी सामान्य प्रभार में रहने की बात कहकर चन्द्रपाल कुशवाहा ने मूल प्राचार्य को वित्तीय प्रभार से पूरी तरह दूर रखा।
सितंबर 2025 में ही चन्द्रपाल कुशवाहा का प्रतिनियुक्ति पर Ad.P.O. सूरजपुर के पद पर तबादला हो गया, लेकिन इसके बावजूद DDO और समस्त वित्तीय प्रभार वे अवैध रूप से अपने ही पास दबाकर रखे रहे। शासन द्वारा 30 अप्रैल 2026 तक की सेवा अवधि के लिए नियुक्त किए गए प्राचार्य को प्रभार न देकर पंगु बना दिया गया, जिससे वे छात्र हित में कोई कार्य नहीं कर सके।
2. बिना ट्रेनिंग दिए रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा कोष से ₹5,000 की निकासी
बयान में खुलासा किया गया कि विद्यालय में रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। आत्मरक्षा के मास्टर ट्रेनर टकेश्वर रजक ने केवल विद्यालय में ज्वाइन किया था, लेकिन उसने छात्राओं को कभी कोई प्रशिक्षण नहीं दिया और न ही वह कभी स्कूल आया।
इसके बावजूद ट्रेनर द्वारा ₹5,000 मानदेय की मांग की गई। जब प्राचार्य ने काम न होने और वित्तीय प्रभार न होने के कारण भुगतान से मना किया, तो ट्रेनर ने दावा किया कि “साहब लोगों ने कहा है कि प्रिंसिपल दे देंगे”। बाद में ज्ञात हुआ कि चन्द्रपाल कुशवाहा द्वारा बिना किसी वास्तविक प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर को ₹5,000 का अवैध भुगतान कर दिया गया।
3. PFMS खाते से ₹40,300 का आहरण: पूर्व में ही DEO को दी गई थी लिखित चेतावनी
विद्यालय के PFMS  खाते में ₹40,300 की राशि प्राप्त हुई थी, जिसे बिना प्राचार्य की सहमति या जानकारी के आहरित कर लिया गया। इस राशि का स्कूल हित या छात्राओं के विकास में कोई उपयोग नहीं हुआ।
इस संभावित गबन की आशंका जताते हुए सेवानिवृत्त प्राचार्य ओमप्रकाश योगी ने 08 अप्रैल 2026 को ही जिला शिक्षा अधिकारी, सूरजपुर को पत्र सौंपकर सूचित कर दिया था कि:
“पूर्व प्रभारी प्राचार्य चन्द्रपाल कुशवाहा वर्तमान में ADPO सूरजपुर के पद पर कार्यरत हैं और समस्त वित्तीय प्रभार उन्हीं के पास है। PFMS खाते से आहरित ₹40,300 में मेरी कोई सहमति नहीं है। भविष्य में होने वाली किसी भी वित्तीय गड़बड़ी के लिए मैं जिम्मेदार नहीं रहूंगा।”

4. शिक्षकों की मिलीभगत, फर्जी उपस्थिति और संविलियन में धोखाधड़ी का आरोप
जांच टीम के समक्ष दर्ज बयान में पूर्व प्राचार्य ने कई अन्य गंभीर प्रशासनिक गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है:
  मिलीभगत से प्रभार का आदेश: आरोप है कि चन्द्रपाल कुशवाहा को बचाने के लिए नीलिमा लकड़ा (व्याख्याता) और कौशिल्या भगत (व्याख्याता) की मिलीभगत से 13 अप्रैल 2026 को आनन-फानन में नीलिमा लकड़ा को शाला का संपूर्ण प्रभार देने का आदेश जारी कराया गया।
अवैध छुट्टी स्वीकृति: व्याख्याता अरुणा एक्का 13 अप्रैल 2026 को लंबी छुट्टी के बाद आईं और रजिस्टर में 1, 01, cl चढ़ाकर पुनः लंबी छुट्टी पर चली गईं, जिसे तत्कालीन प्राचार्य ने अस्वीकृत कर दिया था।
  गैर-पदस्थ शिक्षिका का आहरण: बिना पदस्थापना के वेतन आहरण का मामला भी सामने आया है। एक शिक्षिका (मानती कुजुर) का वेतन नीलिमा लकड़ा द्वारा अपने DDO से निकाला गया, जबकि वे युक्तीकरण के बाद संबंधित स्कूल में पदस्थ ही नहीं हुई थीं।
  संविलियन में धांधली: विद्यालय के ही गैर-शैक्षणिक स्टाफ के हवाले से अरुणा एक्का के संविलियन प्रक्रिया में भी धोखाधड़ी और अनियमितता किए जाने का दावा किया गया है।
‘सिंधु स्वाभिमान’ का सवाल:

जब राज्य शासन ने एक पूर्णकालिक प्राचार्य की नियुक्ति की थी, तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधीन ADPO के पद पर बैठे पूर्व प्रभारी अधिकारी ने DDO प्रभार अपने पास क्यों जमा रखा?
बिना भौतिक सत्यापन और बिना प्रशिक्षण दिए सरकारी खजाने से मानदेय और PFMS फंड की राशि कैसे आहरित की गई?
   ‘सिंधु स्वाभिमान’ जनहित और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता के तहत इस मामले की परत-दर-परत पड़ताल जारी रखेगा। संबंधित पक्षों का पक्ष भी नियमानुसार प्रकाशित किया जाएगा।