शिक्षा के नाम पर खिलवाड़: बिना मान्यता चल रहा ‘नित्या पब्लिक स्कूल’, गुरुजी गायब… सफाईकर्मी चला रहा था कक्षा!

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर, चांदनी बिहारपुर: जिले में शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम खैरा में बिना मान्यता और बिना यू-डाइस कोड के बेखौफ तरीके से ‘नित्या पब्लिक स्कूल’ का संचालन किया जा रहा था। हालात इतने बदतर मिले कि स्कूल में न तो कोई शिक्षक था और न ही संचालक, बल्कि एक सफाईकर्मी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा था।

पत्रकारों की रेड में उजागर हुई हकीकत

क्षेत्र में भ्रमण पर निकली क्षेत्रीय चांदनी बिहारपुर के पत्रकारों की टीम की नजर जब इस तथाकथित स्कूल पर पड़ी और वे अंदर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए,इसके बाद यह जानकारी सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र के टीम तक आई।

  • कमरे और फर्श: मासूम बच्चे किसी क्लासरूम में नहीं, बल्कि एक कच्चे कमरे की फर्श पर बैठने को मजबूर थे। स्कूल में न तो बेंच-डेस्क की व्यवस्था थी और न ही पढ़ाई का कोई माहौल।
  • शिक्षक गायब, सफाईकर्मी का राज: मौके पर पूछताछ करने पर पता चला कि वहां पढ़ाने वाला कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। एकमात्र व्यक्ति वहां सफाईकर्मी के रूप में था, जो अपना काम खत्म कर घर लौटने की तैयारी में था।

सवाल यह उठता है कि आखिर जब स्कूल में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक ही नहीं है, तो इन मासूमों के भविष्य को कौन गढ़ रहा था?

अंधकार में बच्चों का भविष्य और गोलमोल जवाब

बिना किसी मान्यता, पाठ्यक्रम, परीक्षा व्यवस्था या सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे इस संस्थान में बच्चों की जान को भी जोखिम में डाला जा रहा था। जब पत्रकारों की टीम ने फोन के जरिए स्कूल संचालक से संपर्क साधना चाहा, तो वह हर सवाल से बचता नजर आया और गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

एक ही डाइस कोड पर चल रहे दो स्कूल!

फर्जीवाड़े का यह खेल सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि सरस्वती शिशु मंदिर (नया टोला) में भी बड़ा गोलमाल सामने आया है। यहां एक ही डाइस कोड पर नियमों को ताक पर रखकर दो अलग-अलग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं।

अब आगे क्या?

सूरजपुर के इस बहुचर्चित खुलासे के बाद अब पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अभिभावकों और आम जनता की निगाहें अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला प्रशासन पर टिकी हैं:

  1. क्या इस फर्जी और अवैध स्कूल पर तत्काल ताला लगेगा?
  2. मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले लापरवाह संचालक पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
  3. एक ही डाइस कोड पर संचालित हो रहे स्कूलों के खेल पर प्रशासन क्या कदम उठाएगा?

प्रशासनिक अमले की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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