सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर जिले के प्रतापपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मायापुर में एक झोलाछाप काफी प्रसिद्ध है और रोज यह झोलाछाप खुद को डॉक्टर समझकर लोगों का इलाज करते रहता है। यूं तो जिले में कई झोलाछाप हैं जो लोगों का जुगाड़ पद्धति से इलाज करते हैं पर यह झोलाछाप इस लिए इतना खास है क्योंकि यह मायापुर 2 के पूर्व सरपंच का ससुर और वर्तमान सरपंच का पिता करमू है। हमे हमारे विशेष सूत्र ने बताया कि एक बार इसके इलाज से एक जान भी चली गई थी लेकिन करमू जो कि खुद एक झोलाछाप है और उस समय उसकी बहु सरपंच भी थी तो मामले को दबा दिया गया था। करमू नाम का यह झोलाछाप सोमार साय का पिता है और बेटा ही जब सरपंच है तो रोकने टोकने वाला ही कौन होता है,इस धारणा के साथ बाप बेटे दोनों ही नियमों की अनदेखी कर शासन की ठेंगा दिखाने का काम कर रहे हैं। जब सरपंच सोमार साय को यह पता है कि झोलाछाप डॉक्टर शासन के नियम के विरुद्ध काम कर रहे हैं और ऐसे लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए बाबजूद इसके सोमार साय अपने पिता को रोकने के बजाय अपने पिता के इस कारनामे को अपने सरपंच के पद से संरक्षण दे रहा है। यह काफी शर्म की बात है क्योंकि बेटा सरपंच के पद पर होते हुए भी अपने पिता को झोलाछाप वाला काम करने से नहीं रोक पा रहा है तो गांव की क्या दशा होगी यह समझ से परे नहीं हैं। बाप बेटे दोनों मिलकर इस प्रकार के कृत्य को निष्पादित कर रहे हैं जो काफी निंदनीय है। घर में ही रोज करता है करमू झोलाछापगिरी हमारे सूत्र ने बताया कि करमू रोज अपने घर में खुद को डॉक्टर समझ कर लोगों का अपने घोलछपगिरी अंदाज में इलाज करता है और लोगों के उपर अपने तुक्के वाले अनुभव से दवाओं का प्रयोग करता है बाकी जो हो भगवान भरोसे। ऐसे भी हमारे सूत्र ने बताया कि इस झोलाछाप करमू ने पहले ही इलाज के नाम कर एक जान ले ली थी और अपने घर में सरपंच होने अनुचित लाभ लेते हुए इस मामले को दबा दिया था। इस झोलाछाप वाले व्यवसाय से करमू काफी प्रसिद्ध है क्योंकि कई बार आपातकाल की परिस्थितियों में जब लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होता है तो वो इस झोलाछाप करमू के पास जाकर अपना मजबूरी में इलाज करवाते हैं। लेकिन लोगों को पता ही होता है कि झोलाछाप के पास इलाज नहीं करवाना चाहिए पर कुछ आपातकाल की परिस्थितियों में मजबूरन लोगों को करमू के पास जाकर अपना तात्कालिक इलाज करवाना पड़ता है। सरपंची की आड में चल रहा झोलाछाप का कारोबार बेटे के सरपंच होने का लाभ लेना कोई करमू से सीखे और सरपंच होते हुए पिता को आगे बढ़ाना कोई सोमार साय से सीखे,क्योंकि दोनों बाप बेटे मिलकर आप जनता से लेकर प्रशासन दोनों को ही बेवकूफ बना रहे हैं। और यदि उस दौरान कोई परेशानी आ जाए बेटा सोमार साय अपनी सरपंची वाले पावर का उपयोग करके अपने पिता को बचा लेता है।अब देखने वाली बात होगी कि इन बाप बेटों पर प्रशासन कोई कार्यवाही करता है या फिर इन दोनों की आजीविका झोलाछाप और सरपंची में मजे से चलेगी। Post navigation प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र का मामला गरमाया, हाईकोर्ट आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी टोकन तुंहर हाथ मोबाइल एप से धान विक्रय हेतु किसानों के लिए जारी होगा टोकन