क्या इसका विरोध करने का साहस भी नहीं है उन बंगाली समाज के लोगों के पास जिन्होंने कई वर्ष पूर्व झोर अत्याचार की वजह से छोड़ा था देश..?

क्या जो पहले से ही भारतीय बंगाली और सनातनी हैं वो भी इस वीभत्स हत्याकांड का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं..?

क्या सनातनी अब फेसबुक और व्हाट्सएप में डीपी डालने की परिभाषा मात्र रह गई है..?

अच्छे बड़े संपन्न राजनीतिक संपन्न और आर्थिक संपन्न होने और उसे अत्याचार की परिभाषा को समझने और देखने वाले बंगाली समाज के लोग आखिर चुप क्यों हैं

क्या दीपू दास की मौत को एक मामूली घटना समझ रहे हैं भारत के नागरिक


बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता गहराती जा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों से सामने आ रही रिपोर्टों में हिंदू घरों और दुकानों में तोड़फोड़, मंदिरों को निशाना बनाए जाने और समुदाय विशेष को भयभीत करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में एक अत्यंत अमानवीय और कथित घटना ने लोगों को झकझोर दिया है, जिसमें एक हिंदू व्यक्ति को पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन सोशल मीडिया और स्वतंत्र स्रोतों पर इसे लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इन घटनाओं को लेकर भारत में रहने वाले हिंदुओं और प्रमुख संगठनों की मौन प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पड़ोसी देश में हो रही ऐसी घटनाओं पर संवेदनशीलता, स्पष्ट प्रतिक्रिया और कूटनीतिक पहल आवश्यक है, ताकि हिंसा पर रोक लगे और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

एक प्रतिष्ठित न्यूज ने अपने समाचार में बताया है कि ढाका में एक कट्टरपंथी युवा नेता उस्मान हादी पर हुए हमले और मौत के बाद भढ़की हिंसा की वेदी बने बांग्लादेश में हिंदुओं को झोंका जा रहा है।इस्लामिक चरमपंथी उम्मादियों की भीड़ ने दीपू दास नाम के बंगाली हिंदू युवक को टारगेट करते हुए उसे मौत के घाट उतार दिया।दीपू के पिता ने अपने बेटे की मौत का ऐसा ब्योरा दिया है, जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेटा फट जाएगा।

पिता ने सुनाई बेटे के मौत की कहानी

बेटे की मौत की खबर से सदमें में डूबे पिता रवि लाल दास ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपना दुख बताते हुए कहा, ‘बेटे के साथ हुई अनहोनी और उसकी हत्या की खबर सबसे पहले फेसबुक से मिली. आधे घंटे बाद मेरे चाचा ने बताया भीड़ उसे उठा ले गई।पीट-पीटकर निढाल करने के बाद, हैवानों ने उसका बेजान शरीर पेड़ से बांधकर जला दिया और नरपिशाचों की तरह जश्न मनाने लगे।जलाकर मारने के बाद उन्होंने उसे धड़ को बांध दिया।

हमारा उद्देश्य किसी हिंसा को भड़काना नहीं है लेकिन नियम संगत तरीके से इसका विरोध किया जाना चाहिए और हमारे देश के लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस बांग्लादेश में आज हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रही है उसे बांग्लादेश के लिए हमारे वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी तब जाकर की बांग्लादेश का निर्माण हुआ था और आज इस देश के कुछ घटिया मानसिकता के लोगों के कारण अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ अत्याचार और वीभत्स घटनाएं घट रही है जिस पर देश के सभी वर्ग के लोग अधिकतर खामोश है। भारी मात्रा में बांग्लादेश में हुए हिंदुओं पर अत्याचार के कारण बंगाली समाज के लोगों को भारत में शरण लेनी पड़ी थी और आज वह सभी हंसी खुशी से अपनी जिंदगी भारत में जी रहे हैं परंतु जो वहां से नहीं आ पाए उनके साथ जो घटनाएं घट रही है वह किसी से छुपी हुई नहीं है। बंगाली समाज के लोग शायद भूल चुके हैं की नेताजी सुभाष चंद्र बोस अमर वीरगतिप्राप्त खुदीराम बोस जैसे महानायक भी इस धारा में पैदा हुए हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व बलिदान देने से पूर्व दुश्मनों को जहन्नुम भेजने का काम किया था।

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