सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर आजकल अभिव्यक्ति की आजादी को कुछ अनपढ़ और जाहिल लोग अपने अब्बू या पापा की जागीर समझने लग गए हैं क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी के आधार पर किसी को भी सवाल उठाने के नाम पर गाली-गलोज करना इनके लिए आम बात हो गया है और तो और इन्हें लगता है कि इनके बाप दादा स्वतंत्रता की जंग में इनके लिए अभिव्यक्ति की आजादी नामक अनुच्छेद का मेडल लेकर आए थे। आकांक्षा टोप्पो नामक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के द्वारा अधिकारियों नेताओं और पत्रकारों के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा था एक के बाद एक ऐसे वीडियो आकांक्षा के द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किया जा रहे थे जिनमें शब्दों की गरिमा तार–तार हो रही थी बावजूद इसके देश की सबसे पुरानी पार्टी होने का तमगा लेकर घूमने वाली कांग्रेस में कुछ धूम दुमछल्ले जिनका राजनीति के बारे में सही से जानकारी ना हो या यूं कहें जिन्हें ठीक से पॉलिटिक्स का स्पेलिंग तक ना आता हो ऐसे लोग सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर के पक्ष में आकर उसके विरुद्ध खबर लगाने वाले पत्रकारों पर दोषारोपण लग जाते हैं, वह भी एक प्रतिष्ठित पार्टी के सदस्य होने के बावजूद ऐसा इसलिए भी किया जा सकता है क्योंकि ऐसे दुमछल्ले नेता की आज तक कोई पहचान नहीं बन सकी और ना ही ऐसे लोगों को कोई भी दो कौड़ी का भाव देता है। शायद ऐसे लोगों को आकांक्षा टोप्पो की जुबानी ही पसंद आती है और उन्हें आकांक्षा के भाषा में ही समझाया जा सकता है। देश की सबसे पुरानी पार्टी को गर्त में ले जा रहे हैं ऐसे लोग आजकल वोट बैंक बढ़ाने के चक्कर में या यूं कहें अपनी संख्या बढ़ाने मात्रा के लिए कई बड़ी पार्टियां ऐसे लोगों को भी अपने साथ जोड़ लेते हैं और उन्हें बड़े-बड़े पद दे देते हैं जिनको सही से राजनीति का र भी नहीं पता होता है। ऐसे लोग जो गाली गलौज की भाषा का समर्थन करते हैं और तो और ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे की किसी छपरी या नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों। ऐसे लोगों को प्रेस की याद तब आती है जब उन्हें केवल अपनी वाहवाही छपवानी हो ऐसे लोगों का देश का प्रति योगदान शून्य के बराबर होता है और ऐसे लोग धरती पर केवल अपनी मनमानी करने ही आते हैं और दुनिया से नहीं कुछ लेना-देना नहीं होता है सिर्फ किसी पार्टी में जुड़कर कोई पद लेकर अपने व्हाट्सएप में लिखकर या गाड़ी में लिखवा कर अपना रोला या भौकाल जमाना मंत्र आता है। प्रदेश सचिव की शैलेन्द्र प्रताप सिंह की भूमिका निराशाजनक कांग्रेस पार्टी के काफी सीनियर और वरिष्ठ नेता शैलेंद्र प्रताप सिंह यूथ इंटक नामक ग्रुप में मौजूद है जिस ग्रुप में यूथ इंटक का जिला अध्यक्ष पत्रकारों पर दोष रोपण कर रहा है। आपको बता दे की यह वही लोग हैं जो किसी धरने में जब बैठते हैं या फिर किसी मुद्दे पर अपने विचार रखते हैं तो सोचते हैं काश कोई मीडिया कर्मी जाकर उनके न्यूज़ को कवरेज करें जिसे अपने व्हाट्सएप फेसबुक और जान पहचान के लोगों को भेज कर अपनी वाह वाही लूट सके। प्रदेश सचिव शैलेंद्र प्रताप सिंह के होते हुए इस ग्रुप में एक नौसिखिया पत्रकारों पर ऐसे दो-चार ऊपर कर रहा है जैसे विश्व भर के पत्रकार उसके जागीर में आते हैं बावजूद इसके प्रदेश सचिव शैलेंद्र प्रताप सिंह ने ऐसे छपरी छाप नेता को समझाइए तक नहीं दी यह काफी निराशाजनक है। Post navigation कोल माफियाओं ने पर्दाफाश के डर से किया पत्रकार को झूठे मामले में फसाने का प्रयास जशपुरिया ‘रात्रे’ का ‘अंधेरे’ में तीर: ₹50 लाख का नोटिस या पत्रकार का ‘मुँह फुलाने’ की फीस?…