सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर ग्राम हरिपुर से एक ऐसी घटना सामने आ रही है जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी साख बचाने और मार खाने के डर से गांव के प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त शिक्षक और उनके पुत्र के नाम का दुरूपयोग किया। मामला हरिपुर का है जहां अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला और बृजनगर निवासी दिलीप यादव के बीच किसी प्रकार से पैसों की लेन देन हुई थी जिसके बाद दिलीप यादव के बाइक सुजुक्की ज़िक्शर CG 15 DA 5646 को अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला ने दिलीप यादव के पास जाकर बकाया पैसों की मांग की और पैसों के एवज में 20 प्रतिशत ब्याज की मांग की और पैसे ना मिलने पर बाइक लेकर आने की बात अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला ने दिलीप यादव को कहा जिस पर दिलीप यादव भड़क गया और बात चित का माहौल लड़ाई तक आ गया और दिलीप यादव गुस्से में आ गया और दोनों के बीच मार पीट की स्थिति उत्पन्न होने लगी जिसके बाद हालत की गंभीरता को देख अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला ने हरिपुर निवासी और सेवानिवृत शिक्षक श्री माधवेश पाण्डेय और उनके बड़े पुत्र रविशंकर पाण्डेय से अपना परिचय बताकर उनके साथ अपना रिश्ता बताने लगा चुकीं दिलीप यादव को स्कूल में श्री माधवेश पाण्डेय जी ने बढ़ाया है और दिलीप यादव अपने गुरु के सम्मान के चलते अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला की कुटाई पिटाई नहीं करता है और इस कारण अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला सुरक्षितरूप से अपने घर आ जाता है। इस पूरी घटना में दो लोगों के बीच लेनदेन की बात हुई थी जिसमें पैसे लेने वाले और पैसे देने वाले दोनों ने पैसे लेने और देने से पूर्व सेवानिवृत शिक्षक श्री माधवेश पाण्डेय को किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई थी बावजूद इसके अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला के द्वारा श्री माधवेश पाण्डेय और उनके ज्येष्ठ पुत्र रविशंकर पाण्डेय के नाम को का दुरुपयोग करते हुए मार खाने के डर से प्रयोग किया गया, जिससे जानने वालों में पाण्डेय परिवार की छवि को विपरीत प्रभाव पड़ा। हमें सारी जानकारी जब दिलीप यादव जी से हुई तो हमने इसके बारे में उनसे विस्तृत चर्चा की इसके बाद इस खबर का प्रकाशन किया जा रहा है इसमें सोचने वाली बात यह है कि जब दो पक्ष पैसे का लेनदेन कर रहे थे तो तीसरे पक्ष को इस बात की जानकारी भी नहीं थी बावजूद इसके उनके द्वारा तीसरे पक्ष का नाम लेकर अपना काम निकल गया ऐसे लोग राह चलते किसी को भी पिता बना लेते हैं और किसी को भी अपना पूर्वज घोषित कर देते हैं क्योंकि दो पक्षों में जो भी बातचीत थी वह तीसरे पक्ष को ज्ञात तक नहीं थी लेकिन मार खाने के डर से अमित ईश्वर शुक्ला ने तीसरे पक्ष के नाम का दुरुपयोग किया। जब लेनदेन कर चुके थे उसमें डर नहीं लगा तो फिर बाद में लड़ाई और मार खाने के डर से किसी के नाम का दुरुपयोग करना कहां तक सही है..? आजकल लोग प्रतिष्ठित और बड़े लोगों के बीच अपना रिश्ता जोड़ना बहुत आम बात बना दिए हैं।लोगों के द्वारा अक्सर अपने आप को बड़ा बताने और बड़े लोगों से रिश्ता होने की बात कहने से बहुत गर्व महसूस करते हैं और इसी सोच के चलते बड़े लोगों से अपना रिश्ता और पहचान गिनाने लगते हैं। आजकल लोग पहचान बताते बताते किसी को अपना नाना किसी को अपना मामा तो किसी को अपना पिता तक बना ले रहे हैं। चुकीं अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला ने दिलीप यादव से श्री माधवेश पाण्डेय और उनके पुत्र रविशंकर पाण्डेय का नाम इस लिया क्योंकि श्री माधवेश पाण्डेय बृजनगर में शिक्षक थे और गांव के लगभग सभी बच्चे उनके द्वारा शिक्षा प्राप्त किए हैं जिसके चलते गांव के लोगों के बीच उनका बहुत मान सम्मान और आदर है गांव के लोग बहुत ही सम्मान और आदर से उनका नाम लेते हैं जिस बात की जानकारी अमित उर्फ ईश्वर शुक्ला को थी जिसके चलते पिटाई ना खानी पड़े इस लिए श्री माधवेश पाण्डेय के नाम का दुरुपयोग किया, यह काफी निराशाजनक और गिरिहुई मानसिकता की निशानी है।

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