सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र लटोरी तहसील क्षेत्र में जमीन से जुड़े एक प्रकरण में गंभीर प्रशासनिक अनियमितता सामने आई है। दो पक्षों के बीच भूमि विवाद का मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन था, जिसे सक्षम अधिकारी नायब तहसीलदार द्वारा प्रकरण को खारिज कर दिया गया था।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 109 एवं धारा 110 के अंतर्गत किसी भी प्रकार के नामांतरण, सह-खातेदार जोड़ने या रिकॉर्ड में संशोधन से पूर्व सभी संबंधित पक्षों को नोटिस देना एवं आपत्ति का अवसर देना अनिवार्य है।
इसके बावजूद पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उक्त क्षेत्र नायब तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र में होने के बावजूद तहसीलदार द्वारा धारा 32 एवं 33 में निर्धारित क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की सीमा का उल्लंघन करते हुए, बिना किसी सूचना या सुनवाई के दूसरे पक्ष के पक्ष में सह-खातेदार जोड़ने का आदेश पारित कर दिया गया।
यह कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत (Audi Alteram Partem) का खुला उल्लंघन है, जिसे न्यायालयों द्वारा बार-बार अनिवार्य माना गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस आदेश को पटवारी द्वारा धारा 114 के तहत राजस्व अभिलेखों में दर्ज भी कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार, जब किसी प्रकरण में विवाद लंबित हो या आदेश पारित हो चुका हो, तब तक रिकॉर्ड में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला निम्न प्रावधानों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है—
धारा 32, 33 – अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण
धारा 109, 110 – नामांतरण/सह-खातेदार जोड़ने की प्रक्रिया का उल्लंघन
धारा 114 – अवैध रूप से राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन
यदि यह सिद्ध होता है कि आदेश पैसों की लालच या दबाव में पारित किया गया, तो यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं 13 के अंतर्गत भी जांच योग्य बनता है।
पीड़ित पक्ष ने आदेश के विरुद्ध धारा 44 के अंतर्गत पुनरीक्षण (Revision) एवं उच्च अधिकारियों से स्थगन (Stay) की मांग की है। साथ ही मामले की शिकायत एसडीएम, कलेक्टर एवं राजस्व आयुक्त तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक और बड़ा उदाहरण बन सकता है।

तहसीलदार ने आदेश जारी करते हुए आनन फानन में आदेश का पालन पटवारी के माध्यम से करवा दिया है, और इस बात की जानकारी पीड़ित पक्ष को होने तक ना दी जिससे किसी प्रकार की आपत्ति तक दर्ज नहीं करवा का सकी। यूं तो लटोरी तहसील में अनेक मामले होते रहते हैं जिसमें नियमों की खुली अनदेखी होती है और इनपर सब मेहरबान भी रहते हैं लेकिन जल्द ही लटोरी तहसील के संबंध में प्रकाशित खबर में बताया जाएगा कि इसी तहसील अंतर्गत ग्राम मोहनपुर में शासकीय मद की भूमि(सिंह देव पट्टा ) को भू माफियों के साठ गांठ से कैसे अपना बनाया जाता है। हालांकि इस मामले पर संबंधित अधिकारी को फोन के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया जा चुका है लेकिन अब तक अधिकारी अपने व्यस्त कार्य के चलते इसके संबंध में हमें कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed