लंबे समय तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं, खबरों के बाद संशोधित रिकॉर्ड जारी

मामला केवल नाम हटाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें कई बड़े चेहरे अभी बेनकाब होने बाकी हैं

नाम किसी और का, पैसा और काम किसी और का,दलाली कोई और कर रहा है

आदिवासी के जमीन को हड़पने का मास्टर प्लान, नेता और रसूखदार दोनों की नजर आदिवासी कोरवा जमीन पर

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर लटोरी
सूरजपुर जिले के संबंधित ग्राम में राजस्व अभिलेखों को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ सामने आया है। पूरे मामले में अब तक कोई भी ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच संबंधित पटवारी द्वारा पुनः वंशावली जारी कर सभी संतानों के नाम जोड़ दिए गए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

ज्ञात हो कि पहले जारी किए गए दस्तावेजों में स्व. सोहन को ‘निःसंतान’ दर्शाया गया था, जबकि उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्रियाँ जीवित हैं। इसी प्रकार स्व. कृपाराम के मामले में भी बेटियों के नाम प्रारंभिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं किए गए थे। इसको लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा और आपत्ति उठती रही।

अब आरोप है कि संभावित जांच और कार्रवाई के भय से पटवारी द्वारा संशोधित वंशावली जारी कर सभी वैधानिक वारिसों के नाम जोड़ दिए गए हैं। यदि पहले की प्रविष्टि सही थी तो बदलाव क्यों? और यदि पहले गलती थी, तो उस गलती के लिए जिम्मेदार कौन — यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मीडिया और ग्रामीणों द्वारा मुद्दा न उठाया जाता, तो शायद यह संशोधन भी न होता। वहीं अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की स्पष्ट जांच रिपोर्ट या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, उत्तराधिकार संबंधी रिकॉर्ड में इस प्रकार की त्रुटि या बदलाव गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि इस जमीन को खरीदने बेचने के पीछे काफी रसूखदारों का योगदान है,जिसमें कोरवा के जमीन को हड़पने के लिए एक मास्टर प्लान बनाया गया है, लटोरी में कार्यरत एक व्यक्ति और एक नए नवेली जनप्रतिनिधि की भूमिका अहम है। खैर इनके द्वारा पैसा और पावर दोनों का प्रयोग किया गया जिससे यह जमीन हड़प कर  उससे बाद में मोटा पैसा छाप सकें। इनके नाम और इनकी भूमिका के विषय में एक संक्षिप्त खबर अगले अंक में प्रकाशित किया जाएगा।

फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सवाल यही है —
क्या केवल रिकॉर्ड संशोधन से मामला समाप्त मान लिया जाएगा,
या फिर पहले की कथित गड़बड़ियों की भी जवाबदेही तय होगी?

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