सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अगर आपके पास भी व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर ऐसा कोई मैसेज आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ₹1 लाख से कम कमाने वाले दुकानदारों या आम ग्राहकों को अब हर UPI ट्रांजेक्शन पर 4% का टैक्स देना होगा, तो सावधान हो जाइए! यह खबर पूरी तरह से निराधार और फर्जी है। सरकार या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने ऐसा कोई नियम जारी नहीं किया है। आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए UPI भुगतान पहले की तरह ही 100% मुफ़्त और टैक्स-फ्री है। फर्जी दावे का गणित बनाम असली नियम सोशल मीडिया पर लोगों को भ्रमित करने के लिए फर्जी दावों में आंकड़ों का सहारा लिया जा रहा है। आइए समझें कि अफवाह में क्या दावा किया जा रहा है और हकीकत का गणित क्या है: विषयसोशल मीडिया की अफवाह का दावाRBI / NPCI का असली नियम टैक्स / चार्ज दर4% अतिरिक्त टैक्स कटेगा0% (कोई चार्ज या टैक्स नहीं)ग्राहक पर असरहर UPI पेमेंट पर 4% कटेगामुफ़्त (₹0 अतिरिक्त)छोटे दुकानदार₹1 लाख से कम आय पर 4% शुल्कमुफ़्त (बैंक-टू-बैंक QR पर ₹0 शुल्क)आय सीमा का नियम₹1 लाख आय वाले निशाने परऐसी कोई शर्त लागू ही नहीं है क्यों और कहाँ से फैली यह अफवाह? अक्सर लोग वित्तीय नियमों को सही ढंग से न समझ पाने के कारण भ्रम का शिकार हो जाते हैं: वॉलेट मर्चेंट चार्ज : सरकार ने पिछले वर्ष केवल ‘पेटीएम वॉलेट’ या ‘अमेज़न वॉलेट’ जैसे डिजिटल वॉलेट से बड़े मर्चेंट्स को ₹2,000 से अधिक भुगतान करने पर 1.1% तक का इंटरचेंज शुल्क लागू किया था। यह आम UPI (गूगल पे, फोनपे या बैंक टू बैंक) पर लागू नहीं होता और न ही यह 4% है। आयकर (Income Tax) नियम: UPI पर अलग से कोई ‘UPI टैक्स’ नहीं होता। किसी भी व्यक्ति या व्यापारी की साल भर की कुल कमाई (चाहे वह कैश हो या UPI) अगर आयकर छूट सीमा से ऊपर जाती है, तो उन्हें सामान्य नियमों के तहत ही टैक्स देना होता है। UPI लेन-देन और टैक्स/शुल्क का पूरा सच: किसे, कब और कितना शुल्क देना होगा हाल ही में सरकार और NPCI द्वारा जारी MDR दिशा-निर्देशों और आयकर (Income Tax) नियमों के तहत UPI भुगतान की व्यवस्था को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है: 1. आम ग्राहक (GPay, PhonePe, Paytm यूजर्स) टैक्स या शुल्क: 0% (पूरी तरह मुफ़्त) नियम: आम ग्राहक चाहे किसी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करे (P2P) या किसी दुकान पर भुगतान करे (P2M), ग्राहक से कोई चार्ज या टैक्स नहीं लिया जा सकता। उदाहरण: यदि आप दुकान से ₹5,000 का सामान खरीदते हैं और UPI करते हैं, तो आपके बैंक से ठीक ₹5,000 ही कटेंगे। 2. छोटे दुकानदार (P2PM मर्चेंट्स – ₹1 लाख/माह तक की कमाई) टैक्स या शुल्क: 0% (कोई शुल्क नहीं) नियम: ऐसे छोटे वेंडर, ठेले वाले या किराना दुकानें जो महीने में अपने UPI QR कोड पर कुल ₹1,000 से लेकर ₹1,000,00 (1 लाख रुपये) तक की राशि प्राप्त करते हैं, उन्हें कोई MDR शुल्क नहीं देना पड़ता। अपवाद: यदि कोई ग्राहक इन्हें ₹2,000 से बड़ा सिंगल पेमेंट भी करता है, तब भी छोटे दुकानदार की केटेगरी होने के कारण यह मुफ़्त रहता है। 3. बड़े मर्चेंट्स (Regular Merchants – ₹1 लाख/माह से अधिक लेन-देन) टैक्स या शुल्क: 0.4% तक MDR (यह टैक्स नहीं, पेमेंट सर्विस फीस है) नियम: ऐसे रजिस्टर्ड मर्चेंट्स जिनका कारोबार ₹1 लाख/महीने से अधिक है, उन पर ₹2,000 से ऊपर के सिंगल पेमेंट प्राप्त करने पर अधिकतम 0.4% का MDR शुल्क लगता है (जिसे बैंक और पेमेंट ऐप्स आपस में बांटते हैं)। MDR शुल्क का गणित: लेन-देन की राशिMDR दर (0.4%)दुकानदार को प्राप्त कुल राशि ₹2,000 तक₹0₹2,000 (पूरा) ₹3,000₹12₹2,988₹10,000₹40₹9,960₹50,000₹200₹49,800₹75,000 या अधिक₹300 (अधिकतम कैप)₹74,700 नोट: पेट्रोल पंप, रेलवे, बिजली बिल और टेलीकॉम भुगतान पर ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर केवल ₹5 का फ्लैट शुल्क लगता है। 4. इनकम टैक्स किसे देना होगा? UPI कोई टैक्स नहीं काटता, लेकिन आयकर विभाग बैंक खाते में आने वाले पैसे पर नजर रखता है: व्यापारिक कमाई पर: अगर किसी दुकानदार या व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के जरिए पूरे साल में ₹7 लाख से अधिक (नया टैक्स स्लैब) की शुद्ध आय आती है, तो उसे आयकर नियमों के तहत अपनी कुल आय पर टैक्स देना होगा। दोस्तों/रिश्तेदारों से लेन-देन पर: परिवार या दोस्तों के बीच पैसे ट्रांसफर करने पर कोई टैक्स नहीं लगता। हालांकि, गैर-रिश्तेदारों से 1 साल में बिना किसी कारण ₹50,000 से अधिक का गिफ्ट/कैश UPI के जरिए मिलने पर वह ‘Income from Other Sources’ के तहत कर योग्य माना जा सकता है। संपादकीय अपील: UPI का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित और निशुल्क है। किसी भी भ्रामक जानकारी या फर्जी व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर आंख मूंदकर विश्वास न करें और न ही इसे आगे शेयर करें। आधिकारिक जानकारी के लिए केवल बैंक या NPCI की वेबसाइट पर ही भरोसा करें। Post navigation दिलेश देवांगन का दोहरा चरित्र और घटिया मानसिकता: एक तरफ ब्राह्मणों को बेचता है HDFC का इंश्योरेंस, दूसरी तरफ चंद लाइक्स के लिए करता है बनाम