सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र बलरामपुर / चांदो बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र से राहत भरी खबर सामने आई है। जंगल से भटककर वन विभाग की नर्सरी के पास पहुंचे एक भालू का पैर नर्सरी की सुरक्षा के लिए लगाई गई चैन लिंक (लोहे की जाली) में बुरी तरह उलझ गया। समय रहते वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए भालू को सुरक्षित बचा लिया गया है। नर्सरी की सुरक्षा जाली में जा फंसा पैर जानकारी के अनुसार, चांदो रेंज के वन क्षेत्र से सटकर स्थित वन विभाग की पौध नर्सरी के समीप एक वयस्क भालू विचरण कर रहा था। इसी दौरान नर्सरी को मवेशियों और बाहरी जीव-जंतुओं से बचाने के लिए घेरी गई चैन लिंक फेंसिंग में भालू का पैर फंस गया। काफी मशक्कत के बाद भी भालू अपना पैर निकालने में असमर्थ रहा और वहीं असहाय अवस्था में फंस गया। मौके पर पहुंचे विशेषज्ञ, चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन नर्सरी की निगरानी और गश्त कर रहे वनकर्मियों की नजर जैसे ही फंसे हुए भालू पर पड़ी, उन्होंने तत्काल इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरगुजा (अंबिकापुर) से वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सक और वन विभाग की स्पेशल रेस्क्यू टीम को तत्काल मौके पर रवाना किया गया। डार्ट (टैंकुलाइजर) से किया गया ट्रैंकुलाइज मौके पर पहुंची विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखते हुए सबसे पहले भालू को शांत करने और बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकालने की योजना बनाई। वन्यजीव चिकित्सक द्वारा ट्रैंकुलाइजर गन के माध्यम से सटीक डार्ट लगाकर भालू को सुरक्षित रूप से बेहोश किया गया। भालू के अचेत होने के बाद टीम के सदस्यों ने चैन लिंक के तारों को कटर की मदद से काटकर उसके पैर को सुरक्षित बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद जंगल में छोड़ा गया पैर निकालने के उपरांत पशु चिकित्सकों द्वारा भालू का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें उसके पैर में गंभीर चोट न होने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम भालू को सुरक्षित वाहन में लेकर घने जंगल के भीतर ले गई, जहां होश में आने के बाद उसे प्राकृतिक आवास में विचरण के लिए वापस छोड़ दिया गया। वन विभाग और रेस्क्यू टीम की इस तत्परता की सराहना की जा रही है, जिससे एक बड़े हादसे को टालते हुए वन्यजीव की रक्षा की जा सकी। Post navigation बलरामपुर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: गाजर गाँव में 31 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, 3.851 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त