सिंधु स्वाभिमान अम्बिकापुर खेद के साँथ लिखना पड रहा है।कि–एक समय था,जब जिला पैदल पुलिस गरीबों,कमज़रों की संवैधानिक मौलिक अधिकारोंं की सुरक्षा के लिये समर्पित रहे? कमजोरो का सहयता करते अब नही? अब सँम्भवतः केवल-व-केवल पैसे वालों,बाहुबलीयों असमाजिको के लिये मात्र सीमित हो गई हैं। वह समय भी रहा,जब-चाहे किसी भी पद के,पुलिस अधिकारी/कर्मचारी हो चाहे किसी प्रकार कि-छोटी से छटी गल्ती, को जाने-अन्जाने मे करने पर,तत्काल अनुशासनात्मक उचित कार्यवाई,चाहे एक ही-पद सिनीयर क्यों न-हो उनके वरिष्ठ अनुशासनात्मक अंकुशित करते थे।बडी गल्ती पर आवश्यक रुप से निष्पक्षता पुर्वक विभागीय जाँच कर उचित दण्डों से दण्डित किया जाता था।अब तो पुलिस चाहे लुट पाट करें या अपराध और अपराधियों को जन्म देकर गरीबो को लुटवायें,चोरी करायें,या मन्दिर का ही दान-पेटी चोरी करवाये।कमजोरों के रिपोर्ट अपराधी को बचाने के लिये नही लिखे कुच्छ भी करें,अंकुशन वरिष्ट अधिकारियों के पद्दीये कर्तब्य से हटा दिया जाना प्रतीत होता है। पहले किसी भी प्रकार के विपरीत टीप किसीके विरुद्ध सार्वजनिक छपने के तत्काल कटिँग के साँथ पुलिस अधिकारी के विरुद्ध जाँच व दण्डात्मक कार्यवाई करते थे।अब शिकायत जाँच मे प्रमाणित अभिलेखें जाँच अधिकारी को,कर्तब्य बिमुखता जैसे के-अतिरिक्त लुट करने,जैसे कृत्य बाबत जाँच अधिकारी को देने के बाद भी,तीजोरी भर देने के बाद,उपनि०ओमप्रकाश यादव को आज तक निरंकुश रखा गया है।कई शिकायतें राज्य से,केन्द्र तक भेजा-सभी जाँच के आड ले अप्रणीत का कुटरचित/गलत रिपोर्ट तैयार कर्ता के तिजोरी भरने के बाद,भेज कर बचाया गया है।आप सोंच सकते हैं कि- प्रभारी उपनि०ओमप्रकाश यादव द्वारा जब मँदिर की सम्पति तक गायब कर करा लेने के बाद भी आज तक निरंकुश रखा गया है।ये अंबिकापुर के पुसिंग कानून व्यवस्था है? कमजोर असहाय का आगे क्या होगा?——–उक्त प्रकार के अतिरिक्त संबंधित भ्रष्ट व दोषियो के संविधानिक नियुक्ति अधिकारी को धारा 197जा.फौ.की अनुमति भी नही देते ताकि न्याय हेतु,सिधे न्यायालय का शरण ले सकुँ? ये हैं सरगुजा के पुलिस यही है येही आम जनता को शान्ति शुरक्षा दकर अपराध और अपराधियों का पता कर पकड कर न्यायालय से अपराधियों को सजा दिलाना जनहित मे प्रसारितयह लेखनी सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री जनक लाल गुप्त जी की है, सोचने वाली बात यह है की एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जो कि अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनके साथ ऐसी घटनाएं घट रही है और पुलिस उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रही है तो फिर आम जनमानस के साथ क्या सुलूक किया जाता होगा यह बताने की आवश्यकता नहीं है। Post navigation घर में किताब छत्तीसगढ़ में 24 घंटे के भीतर 370 नए मामले सामने आए,बेकाबू हुए हालत तो लग सकता है लॉकडाउन..?