सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र वाड्रफनगर अक्सर देखने को मिलता है कि शासन प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी अपने कार्यों को लेकर उतना रुचि नहीं रखते हैं जितना की अपने वेतन के प्रति रखते हैं और जब ऐसे लापरवाह लोगों के बीच कोई काम करने वाला अधिकारी आ जाता है तो पहले लापरवाह लोग उसे  कुछ दिनों तक झेलते हैं लेकिन जब लापरवाह कर्मचारियों की हदें पार हो जाती है तो ऐसे में हुए एकजुट होकर या यूं कहें सभी चोर चोर मौसेरे भाई एक साथ मिलकर उस ईमानदार अधिकारी के खिलाफ साजिश रचने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला बलरामपुर जिले के वाड्राफनगर ब्लॉक का है जहां पर बीएमओ हेमंत दीक्षित के ऊपर उनके अधीनस्थ कर्मचारी के द्वारा कई गंभीर और संगीन आरोप लगाए गए हैं। मामला यहीं नहीं रुकता है इस विषय पर नर्सिंग स्टाफ के संघ के द्वारा भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी को हटाने की मांग की गई है। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अपने पद के कर्तव्यों का निर्वाह करना एक अधिकारी को इतना महंगा पड़ रहा है। आखिर संसाधनों और चिकित्सकों की कमी के बावजूद अगर कोई अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए दिन हो या रात लोगों की सेवा करता हो और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निस्वार्थ रूप से लोगों की सेवा करने तथा उचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की बात करता हो तो वह गलत कैसे हो सकता है..? शायद बीएमओ हेमंत दीक्षित भी लोगों के स्वास्थ्य की चिंता छोड़कर तथा अपने कर्तव्यों का सही से पालन न करते हुए केवल अपने वेतन के आने का इंतजार करते तो वह जिले के सबसे अच्छे बीएमओ हो सकते थे..? लेकिन हेमंत दीक्षित जैसे कुछ स्वास्थ्य अधिकारी आज भी मौजूद है जिनके चलते लोगों को सही समय पर सही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और हेमंत दीक्षित जैसे लोगों के चलते ही लोग डॉक्टरों को भगवान के रूप में देखते हैं।

क्या बीएमओ को स्टाफ की कमी और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद दिन-रात लोगों की सेवा करने की मिल रही है सजा..?

अगर आप आंकड़ा उठा कर देखें तो आपको मिलेगा की वाड्रफनगर क्षेत्र में मेडिकल स्टाफ की काफी कमी है और साथ ही इस क्षेत्र में काफी सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है जिसकी बावजूद भी बीएमओ हेमंत दीक्षित के द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात प्रयास किया जा रहा है जिससे जरूरतमंद लोगों को हर संभव और हर समय क्षमता अनुसार बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल पा रही है जिससे तंग आकर कुछ मेडिकल स्टाफ के द्वारा इस सख्ती की शिकायत की जा रही है। एक डॉक्टर का कर्तव्य होता है अपने पास आए मरीज को हर संभव चिकित्सीय सहायता प्रदान करना और उन्हें शासन द्वारा उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिलाना लेकिन जब आप लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराते हैं तो आपको अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ कार्य करना होता है और ऐसे में कई ऐसे स्टाफ होते हैं जो इस बात से ना खुश होते हैं क्योंकि इस दौरान ना तो समय का कोई बंधन होता है और ना ही अपने दायित्व की कोई सीमा। आखिर जब आरामदायक और आसान तरीके से अपना वेतन प्राप्त किया जा सकता है तो फिर कोई कर्मचारी क्यों इतना मेहनत करना चाहेगा क्योंकि इस परोपकार और कर्तव्य निष्ठा का कोई अलग से वेतन तो नहीं मिलता है।

यार जैसे शब्द पर सवाल उठाना खुद में एक सवाल है

आमतौर पर देखा जाता है कि बड़े अधिकारी अपने से छोटे कर्मचारियों पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और उनके साथ और व्यवहार करते रहते हैं लेकिन बीएमओ हेमंत दीक्षित अपनी कार्य प्रणाली के साथ-साथ एक व्यवहार कुशल व्यक्ति भी है जो की अपने कार्यालय के चपरासी से लेकर अपने विभाग के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी तक को स सम्मान हुआ सम्मानजनक भाषा का प्रयोग कर संबोधित करते हैं, यार बोलना कोई अपराध नहीं है अनुमान आम बोलचाल की भाषा पर अगर ध्यान दें तो छत्तीसगढ़ में यार काफी लोकप्रिय व प्रचलित शब्द है जिसका प्रयोग एक दूसरे के साथ करके अपने तालमेल को और बेहतर बनाया जाता है ना कि दुर्व्यवहार करने और ना ही किसी महिला से छेड़छाड़ करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार किसी भी अधिकारी के चरित्र पर उंगली उठाना कहीं ना कहीं किसी बड़े साजिश का हिस्सा हो सकता है।

क्षेत्र के लोगों ने बताया दिन रात स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारू रखने और मुश्किल परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बाधित न होने देने की मिल रही है बीएमओ साहब को सजा

क्षेत्र की लोगों के से बात चित के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि बीएमओ हेमंत दीक्षित का व्यवहार काफी व्यवहार कुशल है और वह सभी से सम्मान पूर्वक ही बात करते हैं। अगर अन्य अधिकारियों को भी इस श्रेणी में लिया जाए तो भी हुए सभी नियमों हेमंत दीक्षित के व्यवहार से काफी संतुष्ट और उनके बोलचाल से काफी खुश है। क्षेत्र के लोगों से जवाब इस विषय पर चर्चा करेंगे जो किसी न किसी कारण बीएमओ  साहब से मिलते हैं या फिर उन्हें किसी प्रकार से जानते हो तो वह सभी बीएमओ साहब के व्यवहार के प्रति किसी भी प्रकार की नकारात्मक छवि नहीं रखते हैं। कई लोगों ने हमें बताया कि जब से हेमंत दीक्षित वाड्राफनगर क्षेत्र में आए हैं तब से स्वास्थ्य सुविधाओं में और भी ज्यादा सुधार हुआ है तथा लोगों को पहले से भी अधिक और उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है बावजूद इसके बीएमओ साहब के प्रति इस प्रकार का शिकायत करना काफी निंदनीय है।

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