सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर सरकारी रसूख, राजनीतिक रसूख और पद के दुरुपयोग का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सरगुजा संभाग में सामने आया है। नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय और राजस्व निरीक्षक (RI) मार्टिन एक्का की मिलीभगत से एक बुजुर्ग महिला उमा कुमारी की जमीन को कूटनीतिक और फर्जी तरीके से अपने बेटे के नाम कराने का काला कारनामा उजागर हुआ है। इस मामले में पुनरीक्षणकर्ता (आवेदक) अचिन्त्य पाण्डेय द्वारा कमिश्नर कोर्ट में दायर की गई पुनरीक्षण याचिका को सरगुजा संभाग के आयुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने पूरी तरह से खारिज (अग्राह्य) कर दिया है। कमिश्नर कोर्ट का बड़ा फैसला: शासन हित में जांच जारी रखने के आदेश आयुक्त न्यायालय ने अपने 11 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि कलेक्टर न्यायालय द्वारा 08.08.2025 को शुरू की गई स्वतः प्रेरणा जांच की कार्रवाई पूरी तरह से विधिसम्मत और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि वादभूमि मौके पर एक सघन वन क्षेत्र है, जिसमें शासन का बड़ा हित निहित है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच होना अत्यंत आवश्यक है। कमिश्नर कोर्ट के इस कड़े फैसले से फर्जीवाड़ा करने वाले सिंडिकेट को तगड़ा झटका लगा है। रसूखदार दंपत्ति की साजिश: वकील और कांग्रेसी नेता पत्नी भी शामिलइस पूरे जमीन घोटाले के पीछे एक सोची-समझी साजिश काम कर रही है। सूत्र बताते हैं कि नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय की पत्नी सरिता पाण्डेय, जो कि खुद एक वकील हैं और साथ ही कांग्रेस की नेता भी हैं, इस रसूखदार दंपत्ति द्वारा मिलकर बुजुर्ग महिला उमा कुमारी की बेशकीमती जमीन को अपने बेटे अचिन्त्य पाण्डेय के नाम ट्रांसफर करवाने का पूरा ताना-बाना बुना गया। सरकारी कलम की ताकत और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके एक लाचार बुजुर्ग महिला को उसकी संपत्ति से बेदखल करने का यह प्रयास बेहद निंदनीय है। कलेक्टर की जांच में हुआ था खुलासा: संजीत पाण्डेय और RI मार्टिन एक्का ने पद का किया दुरुपयोगइससे पूर्व, सरगुजा कलेक्टर द्वारा कराई गई एक उच्च स्तरीय जांच में इस काले कारनामे का सनसनीखेज खुलासा हुआ था। जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर सरगुजा ने भी संजीत पाण्डेय (नायब तहसीलदार) और मार्टिन एक्का (रेवेन्यू इंस्पेक्टर) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से गलत ठहराया था। कलेक्टर ने अपने आदेश में साफ तौर पर लिखा था कि: संजीत पाण्डेय द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए मार्टिन एक्का के साथ मिलकर कुत्रचित दस्तावेज तैयार किए थे,संजीत पाण्डेय ने नायब तहसीलदार के पद पर रहते हुए अपने पद की गरिमा और मर्यादा को कलंकित किया। उन्होंने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर, राजस्व निरीक्षक मार्टिन एक्का के साथ मिलकर फर्जी व कुटरचित दस्तावेजों का मायाजाल बुना और अपने पद का घोर दुरुपयोग करते हुए इस विवादित जमीन के फर्जी दस्तावेज अपने पुत्र अचिंत्य पाण्डेय के नाम पर तैयार करवाए। रातों-रात कागजों में हेरफेर और अवैध निर्माणजांच में यह भी सामने आया कि सरकारी तंत्र पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए रातों-रात कागजों में हेरफेर किया गया। बिना किसी सक्षम अधिकारी या न्यायालयीन आदेश के, राजस्व निरीक्षक के माध्यम से अवैध रूप से नक्शा तरमीम (संशोधन) और बटांकन करा लिया गया। कागजी हेरफेर करने के बाद, आरोपी पक्ष द्वारा बुजुर्ग महिला की जमीन पर जबरन कब्जा जमाकर वहां बाउंड्री वॉल का निर्माण और नलकूप खनन (बोरिंग) जैसे अवैध काम भी धड़ल्ले से करा लिए गए। मौके पर कृषि नहीं, बल्कि खड़ा है 55 सरई वृक्षों का घना जंगलजब रेवती यादव द्वारा अपने भूमि को अचिंत्य पाण्डेय को बेचा गया लेकिन रोड की जमीन की चकाचौंध को देख उमा कुमारी की जमीन पर कब्जा किया गया तो उमा कुमारी अपने पट्टे की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को बचाने के लिए प्रशासन से सहायता मांगी तब कलेक्टर सरगुजा द्वारा जांच कराई गई और अपर कलेक्टर सरगुजा की मौका जांच प्रतिवेदन (स्पॉट इंस्पेक्शन रिपोर्ट) ने कागजी पट्टे की पोल खोलकर रख दी। विक्रेता द्वारा रजिस्ट्री और पट्टे के दस्तावेजों में जमीन पर केवल 1 सरई पेड़ होना दिखाया गया था। जबकि, हकीकत में मौके पर 55 सरई वृक्षों के साथ विभिन्न प्रजातियों के कुल 84 पेड़ मौजूद हैं। यह केवल एक गलती नहीं साजिश प्रतीत होती है क्योंकि दृष्टिहीन या नेत्रहीन व्यक्ति भी अपने जमीन में एक और 84 पेड़ों के बीच का अंतर स्पष्ट ना ही सही पर बता जरूर पाएगा। किसी अंधे को भी यदि जमीन के उस भी भाग में टहलने दिया जाय और बाद में यह पूछा जाय कितने पेड़ थे उस स्थान पर तो वह अंधा भी एक पेड़ नहीं बोलेगा ना देख पाने के कारण भले ही वह गिनती ना कर पाए परन्तु एक नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय, RI मार्टिन एक्का और रेवती यादव और उनके पुत्रों के द्वारा कैसे यह गलती ही यह समझ से परे नहीं हैं क्योंकि निश्चित तौर पे जिसकी जमीन होगी उसी को मालूम होगी कि उसके जमीन में कितना पेड़ है। कमिश्नर ने खारिज की याचिकापुनरीक्षणकर्ता अचिन्त्य पाण्डेय ने ऊपरी अदालत से स्थगन (स्टे) लेकर कलेक्टर की जांच रुकवाने की कोशिश की थी। लेकिन, आयुक्त सरगुजा संभाग ने मामले की गंभीरता और शासकीय वन भूमि के संरक्षण को सर्वोपरि मानते हुए अचिन्त्य पाण्डेय की याचिका को पूरी तरह सारहीन मानकर खारिज कर दिया है। अब इस मामले में कलेक्टर न्यायालय द्वारा पट्टे की वैधता और फर्जीवाड़े की जांच कानून के मुताबिक तेजी से आगे बढ़ेगी। Post navigation छत्तीसगढ़ में 10 जून से रेत उत्खनन पर पूरी तरह रोक; मानसून को लेकर खनिकर्म विभाग का सख्त आदेश