सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर इन दिनों शासकीय नौकरी मिलना बहुत मुश्किल है पर कुछ लोगों को मिल जाए तो उनके घमंड सातवें आसमान पर होते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक प्रशिक्षु रेंजर मुकुल कुमार पाण्डेय जो कि मूलतः बिहार के रहने वाले हैं और अभी अभी परीक्षा पास करके रेंजर के पद पर चयनित हुए हैं और सीसीएफ कार्यालय सरगुजा में परिवीक्षा अवधि में हैं और परिवीक्षा अवधि खत्म होने के बाद उनकी पोस्टिंग होनी हैं, लेकिन प्रशिक्षु रेंजर साहब के सरकारी नौकरी का घमंड उनके सर चढ़ कर बोल रहा है। दरअसल कुछ दिन पूर्व जब मुकुल कुमार अम्बिकापुर के प्रीमियम वाइन शॉप में अपने पसंदीदा ब्रांड की मदिरा ले रहे थे तब पार्किंग की बात की बात को लेकर एक युवक संघर्ष पटेल से उनकी नोंकझोंक हो जाती हैं। युवक संघर्ष पटेल ने हमें बताया कि उनकी गाड़ी सही जगह पर पार्क थीं लेकिन खुद को स्वघोषित शंकरगढ़ का रेंजर बताने वाले मुकुल कुमार ने पहले अपनी गाड़ी गलत ढंग से पार्क की और उल्टा संघर्ष को ही गाड़ी हटाने की बात बोलते हुए अपने वर्दी का रौब दिखाते हुए खुद को शंकरगढ़ का रेंजर बताया। मुकुल पांडे द्वारा संघर्ष के साथ गाली गलौज की गई और अपने गाड़ी में रखें अपने कैप को दिखाते हुए उसे डराने का प्रयास किया।

प्रीमियम वाइन शॉप में अपने पसंद के ब्रांड का शराब लेते प्रशिक्षु रेंजर

जब इस मामले में हमने शंकरगढ़ की रेंजर आशा मिंज से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि शंकरगढ़ में कोई और नहीं बल्कि वो खुद रेंजर के चार्ज पर हैं,और इस संबंध में हमसे और जानकारी मांगी, जिसके बाद ब्रांडेड शराब के शौकीन रेंजर साहब के बिहार नंबर प्लेट की गाड़ी का फोटो जो हमें संघर्ष पटेल से मिला था हमने साझा किया और फिर आशा मिंज ने इस बात की भी पुष्टि की यह गाड़ी उनके किसी स्टाफ की भी नहीं है। हमे लगा कि यह कोई फर्जी व्यक्ति होगा जो खुद को रेंजर बताकर घूम रहा है,लेकिन सच्चाई यह है कि यह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि प्रशिक्षु रेंजर मुकुल कुमार हैं जो अभी अपने परिवीक्षा अवधि में ही हैं लेकिन खुद को शंकरगढ़ का रेंजर घोषित कर दिया है क्योंकि शंकरगढ़ रेंजर का ट्रांसफर हो रहा है।

बिना परिवीक्षा अवधि पार किए हैं सोर्स लगाकर कर रहे हैं पोस्टिंग पाने की कोशिश

आदेश की कॉपी

विभागीय सूत्र बताते हैं कि मुकुल कुमार पाण्डेय की परिवीक्षा अवधि अभी पूर्ण नहीं हुई है लेकिन बाबजूद इसके उन्होंने पहुंच का इस्तेमाल करते हुए विभाग के एक उच्च अधिकारी से एक आदेश जारी करवा लिया है जिसमें उन्होंने शंकरगढ़ में रेंजर पद में की मांग की है लेकिन उल्लेखनीय है आज पर्यंत तक मुकुल कुमार को शंकरगढ़ के रेंजर पद पर नियुक्ति आदेश नहीं मिला है लेकिन पद का गुरूर जरूर आ गया है जिसका उपयोग वो छोटे मोटे लड़ाइयों में कर रहे है।

परिवीक्षा अवधि एक ऐसी अवधि होती है जिसमें नए कर्मचारी का प्रदर्शन और उपयुक्तता जाँची जाती है अगर परिवीक्षा अवधि में रहते हुए ही यह अधिकारी इस तरह का रवैया अपना रहे हैं, तो आगे चलकर यह कैसे अधिकारी बनेंगे यह तो चिंतनीय विषय है?

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