सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर ग्राम पंचायत मायापुर 2 के पूर्व सरपंच के ससुर और वर्तमान सरपंच सोमार साय के पिता करमू के द्वारा विगत कई वर्षों से झोलाछाप बनकर अपना जेब भरने का काम किया जा रहा था लेकिन जब सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र में इसकी खबर प्रकाशित हुई तो उसके द्वारा भय से अपना झोला घर में छुपा लिया। जब हमारे द्वारा इस खबर का प्रकाशन किया गया तो झोलाछाप करमू के पुत्रों के द्वारा समाचार को डिलीट करने का दबाव भी बनाया जा रहा था और उसके बाद बताया गया कि झोलाछाप करमू ने अपना कारनामा बंद कर दिया है। जब बेटा ही सरपंच के पद पर बैठा हो और इससे पहले बहु सरपंच रह चुकी हो तो फिर करमू जैसे झोलाछाप बिना किसी रोक-टोक के अपने कारस्थानियों को अंजाम दिया करते हैं यहां सवाल सिर्फ एक करमू का नहीं है बल्कि ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो शासन के नजरों में धूल झोंक कर लोगों का इलाज करते हैं करमू के पुत्र द्वारा इस बात को स्वीकारा गया कि कुछ समय पहले उसके पिता के इलाज से एक व्यक्ति की मौत हुई थी जिसको बाद में आपसी समझौते के साथ में समझाईस देकर और उन्हें सहायता राशि देकर कार्यवाही करने से मना किया गया था, ऐसे में सवाल उठता है कि जब तक ऐसे झोलाछा लोगों के बीच में रहेंगे तब तक लोग अपने आप को कितना सुरक्षित महसूस करेंगे यह समझ से परे नहीं है। जब इस संबंध में सोमार साय ने सफाई देते हुए हमें बताया कि उसके पिता द्वारा लोगों का इलाज सेवा भाव से किया जा रहा था और अच्छा करने के लिए अच्छी सोच की जरूरत होती है जैसी सलाह एक सरपंच ने हमें दी लेकिन सरपंच महोदय यह भूल गए की वह खुद एक जिम्मेदार पद पर बैठे हुए हैं और इसी का फायदा उठाकर उनके पिता के द्वारा लोगों का इलाज के नाम पर उनके सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है, और झोलाछाप के बड़े बेटे ने हमें पहले ही बताया कि उसके पिता के द्वारा इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी। यह कितनी शर्मनाक घटना है कि मौत जैसी घटना को भी सरपंच के द्वारा मामूली आंका जा रहा है क्योंकि जो झोलाछाप व्यक्ति है वह सरपंच का पिता है इसलिए सरपंच अपने पिता को काम तो छुड़वा दिया लेकिन इस बात को स्वीकार नहीं कर रहा है कि उसके पिता के इलाज के दौरान किसी की जान चली गई थी वहीं इससे विपरीत सरपंच के बड़े भाई ने इस बात को स्वीकार कि उसके पिता करमू के इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी। हालांकि इस बात को जानने वाले सभी जानते हैं और इस विषय पर पूछे जाने पर वे दबी आवाज में सब कुछ बता भी सकते हैं जैसे हमें उनके पड़ोस गांव से एक व्यक्ति ने इसकी जानकारी दी। Post navigation रेंजर बनने से पहले ही वर्दी का रॉब दिखा रहा था मुकुल कुमार,प्रीमियम वाइन शॉप पे हुई नोक झोक संपादक के कुशल मार्गदर्शन के बाद वकील साहब ने सही एड्रेस पर भेजा नोटिस