दिलीप धर ने बढ़ाया बंगाली समाज का मान: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, भूमि समस्याओं के त्वरित निराकरण का मिला भरोसा

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर नेताजी बंग समाज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष दिलीप धर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे पूरे बंगाली समाज के हितों के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। अपने जीवन को बंगाली समुदाय की सेवा में लगाने वाले दिलीप धर सदैव अपने कार्यों से संपूर्ण बंगाली समाज का मान बढ़ा रहे हैं, चाहे वे बंगाली किसी भी क्षेत्र या राज्य के निवासी हों। इसी सेवा भाव की अगली कड़ी में, नेताजी बंग समाज के संरक्षक विवेक वर्धन एवं अध्यक्ष दिलीप धर ने माननीय राज्यपाल महोदय, छत्तीसगढ़ से राजभवन (लोकभवन, रायपुर) में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने समाज की ओर से माननीय राज्यपाल महोदय को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और प्रदेश के बंगाली समाज की दीर्घकालिक समस्याओं को उनके समक्ष प्रमुखता से उठाया।

नेताजी बंग समाज वेलफेयर सोसाइटी द्वारा महामहिम राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन
राज्यपाल को स्मृति चिन्हित करते नेताजी बम समाज बोलकर समिति के अध्यक्ष और संरक्षक विवेक वर्धन


विस्थापित बंगाली कृषक परिवारों के लिए पूर्ण भू-स्वामी अधिकार की मांग
सोसायटी की ओर से सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन के माध्यम से अध्यक्ष दिलीप धर ने राज्यपाल का ध्यान वर्ष 1956 के पश्चात तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) के विभिन्न जिलों जैसे सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, रायगढ़ एवं बस्तर संभाग आदि में बसाए गए बंगाली हिंदू विस्थापित कृषक परिवारों की गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158(4) के तहत 10 वर्ष की अनिवार्य लॉक-इन अवधि काफी पहले समाप्त हो चुकी है। इन परिवारों को भूमि पर काबिज हुए और शासन द्वारा भू-स्वामी अधिकार संबंधी आदेश जारी हुए 20 वर्षों से भी अधिक का समय बीत चुका है।
प्रशासनिक जटिलताओं के कारण अधिकारों का हनन
श्री दिलीप धर ने राज्यपाल महोदय को अवगत कराया कि समयावधि पूर्ण होने के बावजूद आज भी प्रशासनिक जटिलताओं और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में बंगाली हिंदू कृषक परिवारों को अपनी आवंटित भूमि के क्रय-विक्रय, ऋण प्राप्ति (KCC), डायवर्शन या अन्य सरकारी सुविधाओं के हस्तांतरण का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। वे आज भी अपने बुनियादी और मौलिक अधिकारों से वंचित महसूस कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनके अधिकारों का हनन है।
राज्यपाल ने दिए त्वरित और सकारात्मक कार्यवाही के निर्देश
प्रतिनिधिमंडल ने माननीय राज्यपाल महोदय से बेहद सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और भू-राजस्व संहिता की धारा 158(4) के तहत समय-सीमा पूर्ण कर चुके परिवारों के राजस्व अभिलेखों (ऋण पुस्तिका/खसरा) से हस्तांतरण संबंधी प्रतिबंध हटाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का करबद्ध आग्रह किया।
इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय को गंभीरता से लेते हुए माननीय राज्यपाल महोदय ने तत्काल सचिव महोदय को इस मामले में सकारात्मक कार्यवाही करने का कड़ा निर्देश दिया। राज्यपाल के इस त्वरित रुख से छत्तीसगढ़ के हजारों बंगाली हिंदू परिवारों में न्याय की उम्मीद जगी है और इस ऐतिहासिक पहल के लिए संपूर्ण बंगाली समाज  दिलीप धर और नेताजी बंग समाज वेलफेयर सोसायटी का सदैव आभारी रहेगा।

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