अम्बिकापुर : 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के दिन, जब पूरा देश महात्मा गांधी के अहिंसा और शांति के संदेशों को याद कर रहा है, वहीं अंबिकापुर में हिंसा और अवैध हथियारों के प्रदर्शन के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है। समाजसेवी अभय नारायण पांडेय ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को पत्र लिखकर अधिवक्ता संजय अंबष्ट और उनके नाबालिग पुत्र द्वारा सोशल मीडिया (फेसबुक) पर खतरनाक आग्नेयास्त्रों एवं हथियारों के प्रदर्शन की उच्चस्तरीय जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिवक्ता संजय अंबष्ट के फेसबुक अकाउंट पर उनके खुद के तथा उनके नाबालिग बेटे के विभिन्न घातक हथियारों के साथ कई फोटो अपलोड किए गए हैं। शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं और तस्वीरों का उल्लेख किया गया है: 1. AK-47/असाल्ट राइफल जैसा हथियार (05 जनवरी 2015):संजय अंबष्ट एक AK-पैटर्न राइफल को हाथ में लिए दिख रहे हैं, जिसमें अंडर-बैरल अटैचमेंट (UBGL जैसा) भी लगा है। शिकायत में मांग की गई है कि किसी विशेषज्ञ से इसकी पहचान कराई जाए कि क्या यह वास्तविक प्रतिबंधित हथियार है और यह किसके प्राधिकार या किस शासकीय शस्त्रागार (Armoury) से उनके पास आया। 1. हैंडगन/पिस्तौल का प्रदर्शन (21 फरवरी 2015):एक अन्य फोटो में संजय अंबष्ट पिस्तौल जैसी आग्नेयास्त्र के साथ दिखाई दे रहे हैं। इसके स्वामित्व और लाइसेंस की जांच की मांग की गई है। 1. स्कोप वाली राइफल (25 जून 2017):सोशल मीडिया पर स्कोप लगी हुई लंबी राइफल के साथ ली गई तस्वीर के स्रोत व लाइसेंस के सत्यापन की मांग की गई है। 1. नाबालिग पुत्र द्वारा घातक बंदूक (Shotgun) लहराना (07 अक्टूबर 2015):सोशल मीडिया पर संजय अंबष्ट के नाबालिग पुत्र को लंबी बैरल वाली शॉटगन/बंदूक थमाकर तस्वीरें खिंचवाई गईं और “अपनी-अपनी खैर मनाओ…” जैसे कैप्शन्स पोस्ट किए गए। 1. नाबालिग के हाथ में तलवार (28 जुलाई 2018):तस्वीरों में नाबालिग बच्चा तलवार जैसे धारदार हथियार के साथ भी दिखाई दे रहा है। किन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग?शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि: आर्म्स एक्ट (Arms Act, 1959): धारा 9 के तहत 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को हथियार देना या उसके पास होना गैर-कानूनी है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3, 7, और 25 के तहत जांच कर कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया गया है। जूवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act): नाबालिग बच्चे को घातक हथियार सौंपने की परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन लागू जूवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 23 के तहत जांच की मांग की गई है। डिजिटल साक्ष्य सौंपने की तैयारीशिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि फेसबुक पोस्ट्स/फोटोज से संबंधित डिजिटल साक्ष्य और मेटाडेटा सुरक्षित कर लिए गए हैं, जिन्हें विवेचना अधिकारी को सौंपा जाएगा। जरूरत पड़ने पर मेटा (Facebook) से आधिकारिक रिकॉर्ड निकालकर पोस्ट की प्रमाणिकता, समय और तारीख का सत्यापन भी कराया जाएगा। गांधी जयंती के दिन इस तरह की शिकायत सामने आने पर यह संदेश दोहराया गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और हथियारों के अवैध प्रदर्शन तथा हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अब देखना है कि केवल सोशल मीडिया में पिस्टल के फोटो पर स्वतः संज्ञान लेने वाली पुलिस प्रतिबंधित हथियारों के प्रदर्शन पर क्या कार्यवाही करती है ? Post navigation सूरजपुर वनमण्डल द्वारा ‘वन्यजीव सप्ताह प्रतियोगिता–2026’ का आयोजन; फोटोग्राफी और रील बनाकर जीतें नकद पुरस्कार