सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र रामानुजगंज आज कल राजस्व विभाग में लोगों के काम से अधिक धांधली की खबरें जादा सामने आने लगी है,अब राजस्व में आम लोगों की सुनवाई से जादा दलालों का बोल बाला हो गया है। रामानुजगंज में बड़े राजस्व भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है जहां 5 भाइयों के संयुक्त खाते की जमीन को कुछ जमीन दलाल और तहसीलदार/उप रजिस्ट्रार के द्वारा केवल एक भाई की हस्ताक्षर से बिक्री कर दी जाती है। आपको बता दें कि पांच भाइयों के संयुक्त खाते की जमीन को केवल एक भाई के हस्ताक्षर से ही साठ गांठ करते हुए रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया को पूरा कर दिया गया लेकिन जब इस संबंध में बाकी भाइयों को जानकारी हुई तो उन्होंने अपने भाई से इस संबंध में पूछा तो बाकी भाइयों को बताते हुए जमीन बिक्री करने वाले भाई ने बताया कि वह अपने पट्टे के (जो संयुक्त खाते से अलग है) की जमीन को केवल बेचने के लिए राजी हुआ था जिसके लिए वह उप पंजीयक के कार्यालय में गया था लेकिन उसकी जानकारी के विरुद्ध संयुक्त खाते की जमीन को ही रजिस्ट्री कर दी गई। यह बहुत गंभीर विषय है क्योंकि पांच भाइयों के संयुक्त खाते की जमीन एक भाई के हस्ताक्षर से कैसे बिक सकती है यह तो तहसीलदार/उप पंजीयक मनोज पैकरा ही बता सकते हैं। लेकिन पूर्व के कलेक्टरों के आदेश का अवलोकन करें तो इस पर कलेक्टर सूरजपुर और कलेक्टर सरगुजा ने रोक लगाई थी जिससे यह पूर्णत विधि और नियम के विरुद्ध प्रतीत होता है।इन आदेशों का अध्ययन करने से जानकारी मिलती हैंवकी राजस्व के नियम के अनुसार संयुक्त खाते की जमीन में जब तक सभी खातेदार आपसी सहमति न बना ले तब तक उक्त भूमि की बिक्री नहीं हो सकती है। आखिर कुछ अधिकारी राजस्व विभाग में आने के बाद इतने भ्रष्ट कैसे हो जाते हैं यह तो सोचने का विषय है लेकिन तहसीलदार मनोज पैकरा ने शासन द्वारा गठित नियम को ताक पर रखते हुए आखिर कैसे पांच भाइयों की संयुक्त खाते की जमीन को एक की उपस्थिति में वह भी अपने निजी और एकल स्वामित्व की भूमि को विक्रय करने आया था उसके संयुक्त खाते की भूमि को रजिस्ट्री कैसे करवा दिया यह सोचने का विषय है। क्योंकि यह कृत्य राजस्व के नियमों के साथ-साथ मानवता के नियमों के भी विरुद्ध हैं आजकल अधिकारी कर्मचारी इतने बेफिक्र हो गए हैं कि उनके विरुद्ध कितनी भी शिकायत और प्रकरण आ जाए परंतु ना तो उन्हें अपने सम्मान का किंचित मात्र भी भय होता है और नहीं अपनी नौकरी के जाने का। तहसीलदार/उप पंजीयक मनोज पैकरा के ऊपर और भी कई गंभीर और रिश्वत लेने के आरोप की जानकारी हमे मिली है हम धीरे धीरे सभी का आने वाले अंक में विस्तृत रूप से प्रकाशित किया जाएगा। एक अन्य मामले में रामानुजगंज के एक दस्तावेज लेखक के द्वारा तहसीलदार/उप पंजीयक के नाम पर पैसों की मांग की गए और उनका रेट लिस्ट भी बताया गया है पीड़ित भाइयों ने बताया कि दस्तावेज लेखक(मुख्तार) ने यह बातें उनसे फोन के माध्यम से की है। Post navigation नशे के सौदागर को पकड़ने के बाद भी ओड़गी थाना प्रभारी फरदीनंद ने क्यों छोड़ा गजेंद्र यादव का भव्य स्वागत : मुकुट और बांसुरी से सम्मानित, समाज भावुक और गौरवान्वित