सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर लटोरी बहुचर्चित लटोरी तहसील में हुआ एक जमीन फर्जीवाड़ा लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के मन में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब जमीन त्र्यंबक गुप्ता नामक व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई है, तो इस जमीन की खरीदी बिक्री के बीच में संजय गुप्ता का नाम क्यों आ रहा है..? हम आपकी इस जिज्ञासा को आज दूर कर रहे हैं कि इस मामले में हम बार-बार संजय गुप्ता का नाम क्यों घसीट रहे हैं।दरअसल हमें इस बात का अंदेशा पहले से ही था कि इस जमीन का संजय गुप्ता से कुछ तो संबंध हैं लेकिन हम इस मामले को लेकर आस्वस्त नहीं थे, लेकिन आपको बता दे की संजय गुप्ता द्वारा स्वयं हमें फोन करके यह बात कही गई थी कि “कृपया करके न्यूज़ ना चलाएं क्योंकि यह जो जमीन है वह उनकी है”। वहीं दूसरी और संजय गुप्ता के बेटे हरिओम गुप्ता का कहना है कि “इस जमीन की दलाली उन्होंने की है और चार-पांच लाख रुपए की कमाई की है।” दरअसल जब त्र्यंबक गुप्ता के शासकीय मद से प्राप्त भूमि के रजिस्ट्री हो जाने के की सूचना और साक्ष्य हमे मिले तो हमने लटोरी के तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा से इस बारे में जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि जब वह नए नए आए थे तो उन्हें भरोसे में लेकर इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए थे लेकिन जब बाद में पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में इस जमीन को शासकीय मद से प्राप्त होना बताया तो फिर तहसीलदार ने इसका नामांतरण नहीं किया,इसके बाद हमारे द्वारा इसका प्रकाशन किया गया तब संजय गुप्ता ने फोन कर हमे बताया कि आपने जो त्र्यंबक वाला न्यूज लगाया है वह मेरा है और न्यूज ना लगाने का आग्रह किया। आज जब इस प्रकरण पर हमारे द्वारा सघन और विस्तृत खबर का प्रकाशन किया जा रहा है तब संजय गुप्ता तहसीलदार और संजय गुप्ता के पुत्र हरिओम की बौखलाहट और झुंझलाहट साफ सामने आ रही है। संजय गुप्ता के द्वारा मार्केट में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि वह हमें कोर्ट में घसीटेंगे और हमें सबक सिखाएंगे लेकिन संजय गुप्ता जो कि एक उम्र दराज व्यक्ति हैं उनके द्वारा इस प्रकार की गीदड़ धमकी देना काफी आशोभनीय हैं। दिनांक 01/08/2025 समय 6:34 मिनट में उन्होंने स्वयं फोन के माध्यम से हमे यह बताया है कि यह जमीन उनकी है। संजय गुप्ता शायद यह भूल रहे हैं कि हम एक जागरूक और शिक्षित पत्रकार हैं। और अगर उन्हें इस मामले को कोर्ट में घसीटना ही था तो इतने दिनों तक किस बात का इंतजार कर रहे थे.?? इस बात से खुद संजय गुप्ता संदेह के घेरे में आते हैं। संजय गुप्ता के छोटे बेटे हरिओम गुप्ता ने मेरे एक करीबी रिश्तेदार को फोन करके भी इस प्रकरण में साष्टांग निवेदन कर इस प्रकरण में न्यूज ना लगने की विन्रम निवेदन किया था साथ ही उसने अपने द्वारा इस जमीन की दलाली में 4 से 5 लाख रुपए लेने की बात भी कही थी। अगर संजय गुप्ता और उनके सुपुत्र गलत नहीं है तो इतना निवेदन क्यों करना पड़ रहा है यह वे स्वयं बताएं। दुनियां को अपनी बहादुरी के किस्से सुनना बहुत आसान है लेकिन सत्यता को किसी झूठे किस्से की जरूरत नहीं पड़ती। Post navigation हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र के संयुक्त खबर का बड़ा असर, रोजगार सहायक का हुआ बंटाधार लेकिन प्रशासन की पक्षपातपूर्ण कारवाही पर उठे सवाल नशे के सौदागर को पकड़ने के बाद भी ओड़गी थाना प्रभारी फरदीनंद ने क्यों छोड़ा