सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर लटोरी किसी भी राजस्व विभाग का उद्देश्य आम लोगों की सेवा करना होता है,और कोई भी सरकारी अधिकारी लोक सेवक के रूप में ही अपने दायित्वों का निर्वहन करता है या यही भावना होनी चाहिए लेकिन कुछ ऐसे निर्णय और पक्षपातपूर्ण कार्यों के चलते यह सब केवल एक कागज में लिखा नियम मात्र लगने लगता है। एक तहसीलदार या कोई भी लोक सेवक जिसकी भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए वो यदि भेदभावपूर्ण कार्य करने लगे तो आम आदमी कहां अपनी आस लगाएगा यह समझ से परे हैं। तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा के द्वारा लटोरी स्थित कई शासकीय भूमि जिनमें कलेक्टर की अनुमति नहीं थी और जिसके विक्रय से 165(7 ख) का उल्लंघन होता है के विक्रय पत्र पर बिना पटवारी प्रतिवेदन के ही हस्ताक्षर कर दिए जिससे उक्त भूमियों का रजिस्ट्री नियम विरुद्ध हो गया और तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने अपने आप को बचाने के लिए नामांतरण की प्रक्रिया को रोक कर रखा है,खैर इसके संबंध में सूत्र बताते हैं कि जब सुरेंद्र पैकरा का ट्रांसफर लटोरी से होगा तो उससे ठीक पहले वो अपने अधूरे काम को पूरा करते हुए चले जाएंगे। जब इस संबंध में सुरेंद्र पैकरा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ लोग उन्हें अपने भरोसे में लेकर इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए हैं खैर सुरेंद्र पैकरा लोक सेवक भले ही हैं लेकिन आदेश केवल अपने उच्च अधिकारियों का मानने के लिए बाध्य हैं ना कि आम व्यक्तियों के लेकिन किसी अनजान व्यक्ति जिनको सुरेंद्र पैकरा जानते तक नहीं हैं और आज पर्यंत तक उनके नाम जान तक नही पाए और शायद वे आज तक दोबारा तहसील में आए भी नहीं होंगे उनके कहने मात्र से तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा ने बिना पटवारी प्रतिवेदन के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कैसे किए यह सोचने वाली बात हैं।

                      सूत्र बताते हैं कि सुरेंद्र पैकरा जो कि माननीय मुख्यमंत्री जी के रिश्तेदार हैं इसी लिए आज तक कोई उच्च अधिकारी उन पर कार्यवाही करने का साहस नहीं जुटा सके हैं और यदि कोई कार्यवाही करने की सोचता भी है तो उसपर ऊपर से फोन करवाकर पैकरा साहब के पहुंच और रिश्ते की जानकारी देकर अधिकारी पर दबाव डाला जाता है और भविष्य में तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा पर कार्यवाही ना करने ही समझाइश भी दी जाती हैं।

इस प्रकरण पर तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा ने कहा कि उनके द्वारा कोई भी गलती नहीं हुई है लेकिन अपने दिए गए बयान में उन्होंने अपने से त्रुटि होने की बात स्वीकारी थी। आखिर तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा की किस बात पर विश्वास किया जाए यह समझ से परे हैं,उनके द्वारा यह भी कहा गया कि यह जमीन शासकीय मद की है और बिना कलेक्टर परमिशन के रजिस्ट्री हुई है जिसके लिए उप पंजीयक भी दोषी है तब हमने एक उप पंजीयक से बात की तो उन्होंने बताया कि तहसीलदार के हस्ताक्षर होने के बाद हम लोगों को पंजीयन कर शासकीय खाते में राजस्व ही जमा करवाना होता है चुकीं तहसीलदार का पद उप पंजीयक से बड़ा होता है तो वह उनके हस्ताक्षर के विरुद्ध नहीं नहीं जा सकते।

क्या अपने से छोटे अधिकारी पर भी कारवाही करने पर दबाव महसूस कर रहे हैं अधिकारी, क्योंकि सूत्रों ने बताया है कि सभी बड़े अधिकारियों पर भारी है केवल सुरेंद्र पैकरा की रिश्तेदारी।

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