सूरजपुर: 3 एकड़ वन भूमि की अवैध बिक्री का खुलासा; मामला प्रकाश में आने के बाद भी वन विभाग की चुप्पी बरकरार

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर छत्तीसगढ़: जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में वन भूमि के अवैध सौदेबाजी का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। ग्राम पंचायत कोल्हुआ में सागवान के पौधों से लदी 3 एकड़ सरकारी वन भूमि को निजी लाभ के लिए बेचने का सनसनीखेज मामला ग्राम पंचायत के ही सरपंच द्वारा किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मीडिया द्वारा मामले को उजागर करने के बावजूद विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
सागवान के पौधों वाली वन भूमि का ₹1.50 लाख में सौदा
शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत कोल्हुआ के सरपंच रामलाल पड़ो ने पद का दुरुपयोग करते हुए 3 एकड़ वन भूमि को अपना बताकर 9 फरवरी 2026 को रामलाल जायसवाल नामक व्यक्ति को 1,50,000 रुपये में बेच दिया। इस अवैध सौदे के लिए बाकायदा पंचनामा तैयार कर गवाहों के समक्ष सरपंच की सील-मुद्रा का उपयोग किया गया।
‘सिंधु स्वाभिमान’ ने किया खुलासा, फिर भी विभाग की चुप्पी
इस पूरे गोरखधंधे को ‘सिंधु स्वाभिमान’ समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इतना ही नहीं, समाचार पत्र के माध्यम से डीएफओ (DFO) सूरजपुर और एसडीओ (SDO) ओड़गी को भी मामले की मौखिक सूचना दी गई। लेकिन विडंबना देखिए कि साक्ष्य सामने होने के बावजूद वन विभाग इस मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है,जबकि इस पूरे प्रकरण का वीडियो और सरपंच के सील साइन वाला पंचनामा वायरल हो चुका है

सरपंच द्वारा अपने सील और साइन के साथ जारी किया गया पंचनामा


विभाग की अनदेखी से पनप रहे भू-माफिया
शिकायतकर्ता संतोषी पति संतोष कुमार (निवासी बंशीपुर) ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में आरोप लगाया है कि:
चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में वन विभाग की लापरवाही के कारण बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अतिक्रमण कर पक्के मकान बनाए जा रहे हैं।
प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खबरें आने के बाद भी कोई जांच नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि किसी बड़े राजनैतिक या प्रशासनिक दबाव के चलते वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश
क्षेत्र के ग्रामीण अब सजग हो चुके हैं और विभाग की इस कार्यप्रणाली से उनमें भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस मामले की प्रतिलिपि सीसीएफ अंबिकापुर को भी भेजी गई है, ताकि उच्च स्तर पर इस भ्रष्टाचार की जांच हो सके।

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