अम्बिकापुर सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र
शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नवापारा में दवा खरीदी के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी और दस्तावेजी खामियों का खुलासा किया गया है।
जांच के दौरान यह पाया गया कि वर्ष 2019–2020 से लेकर हाल के वर्षों तक दवाओं और उपकरणों की खरीदी में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। कई मामलों में कोटेशन प्रक्रिया के बिना ही एकल निविदा के आधार पर खरीद की गई, जबकि नियमों के अनुसार प्रतिस्पर्धी दरों के लिए कई विक्रेताओं से प्रस्ताव लेना अनिवार्य होता है।
जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु:
खरीदी से संबंधित पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, आग लगने की घटना का हवाला दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2024–25 में भी निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पाई गई।
स्टॉक रजिस्टर में दवाओं और उपकरणों की एंट्री स्पष्ट नहीं है, जिससे सामग्री के उपयोग और वितरण पर सवाल उठ रहे हैं।
कई खरीद आदेशों में दरों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका बढ़ गई है।
कैंसर उपचार से जुड़ी दवाओं की खरीदी में भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और संबंधित दस्तावेज अधूरे पाए गए।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जांच दस्तावेजों में खरीदी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें डॉ. आयुष जायसवाल (प्रभारी चिकित्सा अधिकारी) शामिल हैं।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि डॉ. आयुष जायसवाल, शिवानी जायसवाल (एसडीएम) के पति हैं। इससे पूरे मामले में हितों के टकराव  की आशंका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

आगे की कार्रवाई
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि मामले में विस्तृत जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए। रिपोर्ट संबंधित उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है,क्योंकि जांच रिपोर्ट आने के बाबजूद SDM पति के खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैकरा के मामले में सही जांच ना कर उसे बचाने का प्रयास करने वाली SDM महोदया शिवानी जायसवाल के पति आयुष जायसवाल के विरुद्ध उनके विभाग ने बिना किसी दबाव और लालच की जांच करने निष्कर्ष निकला है कि डॉक्टर आयुष जायसवाल प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व उनके साथियों के द्वारा दावों के नाम पर वित्तीय अनियमितता की गई है, यदि शिवानी जायसवाल ने भी सही से जांच की होती तो निश्चित रूप से सद्विक त्रुटि नहीं सोची समझी साजिश निष्कर्ष होता। खैर सही मामलों में खंडन छपवाने वाली SDM महोदया क्या इस विषय पर भी खंडन करेंगी।

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