मैनपाट की ‘बेशकीमती’ जमीन पर नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय और RI मार्टिन एक्का की गिद्ध दृष्टि, कलेक्टर की रिपोर्ट में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र मैनपाट: छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में विकास की बयार क्या चली, सरकारी रक्षक ही भक्षक बनने पर आमादा हो गए हैं। सरगुजा कलेक्टर कार्यालय से जारी ताजा दस्तावेजों ने राजस्व विभाग के एक ऐसे सुनियोजित षड्यंत्र का खुलासा किया है, जिसमें एक नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय और तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (RI) मार्टिन एक्का ने मिलकर एक बुजुर्ग और गरीब महिला की पुश्तैनी जमीन को हड़पने के लिए सरकारी तंत्र का खुलेआम दुरुपयोग किया।
मुख्य मार्ग की जमीन बनी अधिकारियों का लालच
मैनपाट वर्तमान में तेजी से विकसित हो रहा है और पर्यटन के कारण यहां जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। पीड़िता की जमीन मुख्य मार्ग पर स्थित है। इसी ‘प्राइम लोकेशन’ के कारण नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय की नीयत डगमगा गई। शिकायत के अनुसार, पाण्डेय ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पीड़िता के पट्टाशुदा भूमि  को अपने पुत्र अचिन्त्य पाण्डेय के नाम पर दर्ज कराने के लिए फर्जी नक्शा तरमीम और दस्तावेजों में हेरफेर का सहारा लिया।
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट: पद का दुरुपयोग और कूटरचना
कलेक्टर सरगुजा द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

कलेक्टर सरगुजा द्वारा पत्र से हुआ प्रमाणित खुलासा


फर्जी नक्शा तरमीम: जांच में पाया गया कि राजस्व निरीक्षक ने लाल स्याही से गलत ढंग से नक्शा तरमीम किया ताकि पीड़िता की बहुमूल्य भूमि को हड़पा जा सके।
वन भूमि का मामला: जिस जमीन को अधिकारियों ने अपने करीबियों के नाम करने का प्रयास किया, वह वास्तव में सघन वन क्षेत्र और ‘नैसर्गिक जंगल’ की श्रेणी में आती है, जिस पर किसी का भौतिक कब्जा नहीं था।
दस्तावेजों में हेरफेर: नायब तहसीलदार ने अपने पद का अनुचित लाभ उठाते हुए कूट रचित  बिक्री नकल और अन्य राजस्व अभिलेख तैयार करवाए।
RI मार्टिन एक्का पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर सरगुजा ने इस गंभीर भ्रष्टाचार को संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन राजस्व निरीक्षक मार्टिन एक्का के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु कलेक्टर कोरबा को पृथक से पत्र जारी किया है। साथ ही, नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय की भूमिका को लेकर भी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
दलाल और अधिकारियों का अपवित्र गठबंधन
जब जिले के जिम्मेदार राजस्व अधिकारी ही जमीन की ‘डकैती’ में शामिल हो जाएं, तो क्षेत्र के भू-माफियाओं और दलालों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनपाट की जमीनों पर दलालों का कब्जा अधिकारियों के संरक्षण के बिना संभव नहीं है। इस मामले में भी एक राजस्व अधिकारी द्वारा अपने ही परिवार के सदस्य के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराना इस अपवित्र गठबंधन की पुष्टि करता है।
न्याय की आस में बुजुर्ग महिला
पीड़िता उमा कुमारी ने कलेक्टर और सरगुजा आयुक्त के समक्ष न्याय की गुहार लगाते हुए दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। कलेक्टर द्वारा स्थगन आदेश हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से अब पीड़िता को अपनी जमीन वापस मिलने की उम्मीद जगी है।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन इन रसूखदार अधिकारियों को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ देगा या फिर एक गरीब महिला की जमीन हड़पने के जुर्म में इन्हें कोई दंड भी मिलेगा

You missed