सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सुकमा एमबीएम बस्तर ने अपने जारी प्रेस नोट में कहा है की
आदिवासी ग्रामसभा कानून ( पेसा कानून ) 1996 एक्ट भारत में चल रहा है, आधुनिक विकास की परिकल्पना से अगर किसी को अत्यधिक प्रभावित किया है तो वो है देश के जनजातियां या आदिवासी लोग जो लगातार बेदखली का शिकार हुऐ है ! अपने जल – जंगल – जमीन से लगातार बेदखली के कारण आदिवासियों के जीवन में हमेशा संकट बना रहता है।
इस कमी को देखते हुए संविधान भाग नौ के अन्तर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में विशिष्ट पंचायत व्यवस्था लागू करने के लिए पेसा कानून को बनाया गया है बस्तर ट्राइबल एरिया में जगह – जगह कैंप खोले जा रहे हैं जो विकास के नाम पर विनाश हैं। आदिवासियों को नक्सलियों के नाम पर जेलों में बंद करना, बलात्कार – अत्याचार आदि अत्याचार – शोषण किया जा रहा है। आदिवासी -24 दिसंबर पेसा दिवस को जनआन्दोलन/ जन धरना शिविरो पर जारी सरकारी दमन के खिलाफ जनांदोलन करेंगे और जनांदोलनों को व्यापक व मजबूत करेगे, एमबीएम सभी से इस जन आन्दोलनो के प्रति समर्थन व भाईचारा प्रकट करने की अपील करता है।

MBM की अपील
प्यारे सगा जनों से अपिल करते हैं की पत्रकार , बुद्धिजीवी, ध्रुवा समाज, आदिवासी समाज, सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना समाज, अन्य समाजों से अपील करते हैं की अत्यधिक संख्या में शामिल होवे !
मुलवासी बचाओं मंच सभी साथियों को भूमकाल जोहार ।
दिनॉक -24/12/2023
समय-10 से 4.30 तक
विनित : मुलवासी बचाओं मंच
ग्राम सिलंगेर
अध्यक्ष – राघू मिडियाम

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