खाकी पर भारी जनआक्रोश: उमेश्वरपुर चौकी प्रभारी के खिलाफ सरपंचों की आक्रोश, जांच में फूटा गुस्सा

तीन माह बाद भी नहीं हुआ तबादला; जनप्रतिनिधियों ने दी गृह मंत्री और डीजीपी तक शिकायत की चेतावनी


सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र विशेष संवाददाता सूरजपुर उमेश्वरपुर : जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सलका/उमेश्वरपुर पुलिस चौकी इन दिनों विवादों के घेरे में है। चौकी प्रभारी की कार्यशैली से त्रस्त होकर क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के सरपंचों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पुलिस चौकी अब सुरक्षा के बजाय भय और मानसिक दबाव का केंद्र बन चुकी है।
फर्जी एफआईआर की धमकी देने का आरोप
ग्राम पंचायत उमेश्वरपुर की सरपंच सावित्री सिंह के नेतृत्व में तारकेश्वरपुर, जयपुर, वृन्दावन, सरस्वतीपुर, पार्वतीपुर और कोंतल के सरपंचों ने सामूहिक रूप से चौकी प्रभारी सउनि संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोला है।
शिकायतकर्ताओं में मुख्य रूप से जुगेश्वरी (सरपंच, सरस्वतीपुर), राकेश कुमार सिरदार (सरपंच, पार्वतीपुर) और सुनती बाई (सरपंच, कोंतल) शामिल हैं। इन जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि चौकी प्रभारी उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं और बात-बात पर फर्जी एफआईआर में फंसाने की धमकी देते हैं।
विधायक की अनुशंसा के बाद बैठी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक भूलन सिंह ने भी नाराजगी जताई और कार्रवाई की अनुशंसा की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय के निर्देश पर 14 जनवरी 2026 को एसडीपीओ प्रेमनगर को जांच सौंपी गई।
जांच की स्थिति:  2 फरवरी 2026 को हुई आधिकारिक जांच के दौरान अधिकांश सरपंचों ने अपने बयानों में चौकी प्रभारी के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट में प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।


अनुभव की कमी या तानाशाही?
ग्रामीणों के अनुसार, संजय यादव को पदोन्नति के बाद पहली बार किसी चौकी की कमान सौंपी गई है। अनुभव की कमी और उनके कथित कठोर रवैये के कारण क्षेत्र में पुलिस और जनता के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो गई है। शिकायत के तीन महीने बीत जाने के बाद भी अब तक तबादला या ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें: उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी
सरपंचों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो वे इस मामले को पुलिस मुख्यालय (PHQ), गृह मंत्री और डीजीपी तक ले जाएंगे।
चर्चा का विषय: जिले के पुलिस अधीक्षक अपनी बेहतर पुलिसिंग और निष्पक्ष छवि के लिए जाने जाते हैं। अब देखना यह होगा कि जनभावनाओं और सरपंचों के विरोध को देखते हुए विभाग क्या कदम उठाता है।

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