सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर: रेशम विभाग में चूना पोतकर करोड़ों के पौधारोपण घोटाले को अंजाम देने वाले अधिकारियों के चेहरे से अब नकाब उतरने लगा है। जिले के सिरसी, बैजनाथपुर और ऊंचडीह में मनरेगा के तहत हुए इस ‘सफेद झूठ’ पर जब सवाल दागे गए, तो मुख्य किरदार तिलक श्रीवास्तव ने अपनी जवाबदेही स्वीकार करने के बजाय प्रताड़ना का राग अलापना शुरू कर दिया है।कार्यवाही की फाइलों पर जमी धूलहैरानी की बात यह है कि धरातल पर एक भी नया पौधा न होने और पुराने पेड़ों पर चूना लगाकर सरकारी राशि ठिकाने लगाने का मामला उजागर होने के बावजूद, उच्चाधिकारियों ने अब तक चुप्पी साध रखी है। फर्जी मस्टर रोल और कागजों पर मजदूरी बांटने के इस खेल में अब तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही न होना प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या विभाग अपने ही भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है?तिलक श्रीवास्तव की ‘प्रताड़ना’ का सचफील्ड ऑफिसर तिलक श्रीवास्तव, जिन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के माध्यम से विभाग में प्रवेश पाया, अब अपनी कार्यप्रणाली के कारण विवादों के घेरे में हैं। तथ्यों के साथ जब उनसे भ्रष्टाचार पर पक्ष मांगा गया, तो उन्होंने इसे ‘मानसिक प्रताड़ना’ करार दे दिया।विशेष टिप्पणी: शायद श्रीवास्तव जी को असली ‘प्रताड़ना’ अब महसूस हो रही है क्योंकि उनका भ्रष्टाचार का ‘सुरक्षित किला’ ढहता नजर आ रहा है। सच सामने आने का भय जब व्यक्ति को सताता है, तो वह अक्सर विक्टिम कार्ड का सहारा लेता है। जारी रहेगी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिमयदि विभाग को लगता है कि प्रताड़ना का ढोंग करके इस मामले को दबा दिया जाएगा, तो यह उनकी बड़ी भूल है। भ्रष्टाचार के इस ‘सफेद खेल’ का पर्दाफाश तब तक जारी रहेगा, जब तक: 1. पुराने पेड़ों पर चूना पोतने वाले दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती। 2. फर्जी मस्टर रोल के जरिए हड़पी गई सरकारी राशि की रिकवरी नहीं की जाती। 3. तिलक श्रीवास्तव जैसे अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होकर उन पर कड़ी कार्यवाही नहीं होती।सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र इस मामले की तह तक जाएगा। अगर सच उजागर करना प्रताड़ना है, तो तिलक श्रीवास्तव और उनके संरक्षणदाताओं को अभी और ‘प्रताड़ित’ होने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट का हिसाब होकर रहेगा। Post navigation सूरजपुर रेशम विभाग में ‘सफेद चूने’ का काला खेल: कागजों पर पौधे, जमीन पर लीपापोती! भ्रष्टाचार की ‘रेशमी’ चादर में छिपे असली खिलाड़ी कौन? क्या तिलक श्रीवास्तव सिर्फ एक मोहरा है?