सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र सूरजपुर लटोरी गली-गली में शोर है, क्या पटवारी संतोष भनिया चोर है? पैसे मिले तो क्या ऐसे अधिकारी खुद को भी बेच डालेंगे? एक ही तो तहसील है, कितनी बेइमानी करेंगे साहब? लालच आहा लपलप की तर्ज पर क्या पटवारी की जीभ पैसे देख कर लपलपाती है..? क्या अपने परिवार का पेट भी बेइमानी की कमाई से पालते हैं ये लोग? लटोरी (सूरजपुर) | विशेष रिपोर्टराजस्व विभाग की फाइलों में चल रहे ‘कागजी खेल’ का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है। सूरजपुर जिले की लटोरी तहसील में जमीन हड़पने और बंदरबांट की नीयत से एक जिंदा परिवार को कागजों में खत्म कर दिया गया।मामला हल्का नंबर 11 के पटवारी संतोष भनिया से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने भू-माफियाओं से सांठगांठ कर 5 बच्चों के पिता स्व. सोहन को राजस्व रिकॉर्ड में ‘निःसंतान’ घोषित कर दिया।यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश मानी जा रही है।क्या है पूरा मामला?ग्राम पंचायत लटोरी के खसरा क्रमांक 200, 205 और 217 राजस्व रिकॉर्ड में स्व. कृपाराम और सोहन के नाम संयुक्त रूप से दर्ज थे।दोनों की मृत्यु के बाद जब वैधानिक वारिसों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी गड़बड़ी की नींव रखी गई।स्व. कृपाराम के केवल दो पुत्रों के नाम चढ़ाए गएजबकि उनकी तीन बेटियों — रजमेत, देवती और देवकुमारी — को जानबूझकर बाहर कर दिया गयालेकिन इससे भी बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सोहन के मामले में सामने आया।5 बच्चों का पिता कैसे बना ‘निःसंतान’?स्व. सोहन की पत्नी भिन्सो,पुत्र — बृजलाल, गुड्डू (विकास)और पुत्रियां — कविता व मालतीआज भी जीवित हैं।इसके बावजूद पटवारी संतोष भनिया द्वारा जारी इस्तेहार (नोटिस) में सोहन को ‘निःसंतान’ दर्शा दिया गया।सवाल उठता है —👉 क्या पटवारी को परिवार का अस्तित्व नजर नहीं आया?👉 या फिर यह सब जमीन हड़पने की सुनियोजित चाल थी?भू-माफिया, वारिस और सिस्टम की मिलीभगत?शिकायत में आरोप है कि कृपाराम के वारिस रामखेलावन और रमेश ने भू-माफियाओं तथा राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों से गठजोड़ कर लिया।मकसद साफ है —✔️ वारिसों की संख्या घटाओ✔️ कानूनी अड़चनें हटाओ✔️ विवादित जमीन औने-पौने दाम में बेच दोऔर इसी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है सोहन को ‘निःसंतान’ घोषित करना।अब उठ रही हैं ये मांगेंगांव के जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि —🔴 वर्तमान नामांतरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए🔴 पटवारी संतोष भनिया द्वारा जारी फर्जी इस्तेहार की उच्च स्तरीय जांच हो🔴 स्व. कृपाराम और स्व. सोहन के सभी जीवित वारिसों (बेटियों सहित) के नाम तत्काल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंकागजों में इंसाफ या कागजों में खेल?यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र पर बड़ा सवाल है।क्या फाइलों में बैठा सिस्टम पैसों के आगे आंखें मूंद चुका है?क्या जिंदा लोगों को कागजों में मार देना अब सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है?अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘कागजी खेल’ के दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर फाइलें हमेशा की तरह धूल खाती रहेंगी। Post navigation प्रशासन की गोपनीयता पर सवाल: पटवारी और तहसीलदार ने खोला पत्रकार का नाम, महिला कॉल कर कर रही बदसलूकी… उपसरपंच बनने के बाद दिनेश सोनी की बढ़ी गुंडागर्दी, पत्रकार व परिजनों को दी जान से मारने की धमकी