कलेक्टर अजीत वसंत के चाबुक से निजी अस्पताल माफियाओं में हड़कंप; स्वास्थ्य विभाग की औचक छापेमारी में बेनकाब हुआ गंभीर घालमेल, गायत्री और लाइफ लाइन हॉस्पिटल का भी खंगाला गया कच्चा-चिट्ठा। सिंधु स्वाभिमान समाचारपत्र अम्बिकापुर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले निजी अस्पताल माफियाओं के खिलाफ सरगुजा प्रशासन ने पूर्ण युद्ध का ऐलान कर दिया है। जिला कलेक्टर अजीत वसंत के कड़े और सख्त रुख के बाद अम्बिकापुर के निजी स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग की हाई-प्रोफाइल जांच टीम ने जब शहर के नामचीन अस्पतालों में अचानक दबिश दी, तो महावीर हॉस्पिटल के काले कारनामों और बड़े फर्जीवाड़े की कलई खुलकर सामने आ गई। महावीर हॉस्पिटल का ‘महा-फर्जीवाड़ा’: लाइसेंस ‘छोटे’ का, धंधा ‘बड़े’ का! जांच में महावीर हॉस्पिटल का एक ऐसा सच सामने आया है जिसने पूरे शहर को सन्न कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में जब 4 सदस्यीय विशेष टीम महावीर अस्पताल पहुंची, तो वहां स्वास्थ्य मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ती पाई गईं। अवैध ‘लार्ज लैब’ का भंडाफोड़: महावीर अस्पताल प्रबंधन के पास केवल मामूली ‘स्माल लैब’ चलाने की अनुमति (लाइसेंस) थी। लेकिन मोटा मुनाफा कमाने और मरीजों की जान से सौदा करने के लिए अस्पताल प्रबंधन लंबे समय से बिना किसी वैध अनुज्ञा पत्र के अवैध रूप से ‘लार्ज लैब’ का समानांतर कारोबार चला रहा था। मौके पर बड़ी कार्रवाई, मशीनें सील: जांच टीम ने अस्पताल की इस गंभीर धोखाधड़ी और लापरवाही को पकड़ते ही लार्ज लैब में इस्तेमाल हो रही उच्च स्तरीय जांच मशीनों को मौके पर ही सील कर दिया। सख्त अल्टीमेटम: प्रशासन ने महावीर अस्पताल प्रबंधन को दो टूक हिदायत दी है कि जब तक नियमानुसार वैध लाइसेंस प्राप्त नहीं कर लिया जाता, तब तक लार्ज लैब का संचालन पूरी तरह ठप्प रहेगा। उल्लंघन करने पर सीधी एफआईआर की जाएगी। गायत्री और लाइफ लाइन अस्पताल पर भी प्रशासनिक शिकंजा कार्रवाई यहीं नहीं रुकी, प्रशासनिक हंटर शहर के अन्य निजी अस्पतालों पर भी चला: लाइफ लाइन अस्पताल: टीम ने लाइफ लाइन अस्पताल में लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के दस्तावेजों को बारीकी से खंगाला। यहां लार्ज लैब का वैध लाइसेंस उपलब्ध पाया गया। गायत्री अस्पताल: गायत्री अस्पताल के रिकॉर्ड्स और पैथोलॉजी व्यवस्थाओं की गहनता से समीक्षा की गई है, जिसके दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच जारी है। “मरीजों की जान से खिलवाड़ किया तो सीधे जेल जाएंगे अस्पताल संचालक” — कलेक्टर अजीत वसंत कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के तमाम निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा: “स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कोई भी धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन द्वारा निर्धारित मानकों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य है। जो भी अस्पताल या लैब बिना वैध पंजीयन और अनुज्ञा पत्र के अवैध रूप से संचालित पाई जाएगी, उसके खिलाफ न केवल सीलिंग की कार्रवाई होगी, बल्कि संचालकों पर कड़ी से कड़ी कानूनी व आपराधिक धाराएं लगाई जाएंगी।” छापेमारी करने वाली 4 सदस्यीय ‘स्पेशल एक्शन टीम’ इस ताबड़तोड़ और निर्भीक कार्रवाई को अंजाम देने वाली प्रशासनिक टीम में शामिल थे: डॉ. पी.के. सिन्हा (नोडल अधिकारी, नर्सिंग होम एक्ट) डॉ. दीपक गुप्ता (वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट) श्री शिवेंद्र सिंह (टीम सदस्य) श्री संजय पाण्डेय (प्रभारी, नर्सिंग होम एक्ट शाखा) स्वास्थ्य विभाग के इस करारे प्रहार के बाद से अम्बिकापुर के फर्जी और मानकहीन पैथोलॉजी लैब व निजी अस्पताल संचालकों की नींद उड़ी हुई है। Post navigation मैनपाट में अदालती आदेश की धज्जियां: कोर्ट के स्टे के बावजूद विवादित जमीन पर काम जारी, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल